नयी दिल्ली , अप्रैल 10 -- पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर सरकार ने शुक्रवार को व्यापार और निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करने वाली लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और शिपिंग संबंधी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए हितधारकों के साथ दो अलग-अलग बैठकों का आयोजन किया।
पहली बैठक वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता में हुई जबकि दूसरी बैठक की अध्यक्षता बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के सचिव और वाणिज्य सचिव ने संयुक्त रूप से की। इन बैठकों में दोनों मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, बंदरगाह प्राधिकरण, शिपिंग एजेंसियां, निर्यात प्रोत्साहन परिषदें, उद्योग प्रतिनिधि और अन्य हितधारक शामिल हुए।
वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता वाली बैठक पैकेजिंग सामग्री और संबंधित इनपुट्स में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों पर केंद्रित रही। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाओं से पॉलीमर और रेजिन जैसे प्रमुख पेट्रो-रसायनों की उपलब्धता और उनकी कीमत पर असर पड़ सकता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में पैकेजिंग सामग्री की लागत बढ़ सकती है। उद्योग जगत के प्रतिभागियों ने महत्वपूर्ण कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि इससे मझौले, छोटे और सूक्ष्म उद्यम सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव, लॉजिस्टिक्स प्रतिबंध और लागत में वृद्धि से परिधान, चमड़ा, दूरसंचार/ऑप्टिकल फाइबर और चिकित्सा उपकरण जैसे उद्योग प्रभावित हो सकते हैं। हितधारकों ने सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए महत्वपूर्ण कच्चे माल जैसे एलएनजी, हीलियम और पेट्रो-रसायनों की निरंतर उपलब्धता और उनके पास नकदी की उपलब्धता सुधारने के लिए शीघ्र वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) रिफंड की आवश्यकता पर बल दिया।
दूसरी बैठक में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अध्यक्ष और अन्य सीमा शुल्क अधिकारी भी उपस्थित थे। शिपिंग सचिव ने दस्तावेजीकरण प्रक्रियाओं, बैक-टू-टाउन और ट्रांजिट कार्गो मामलों, शिपिंग लाइनों द्वारा लाभ, हवाई मार्ग से माल ढुलाई की लागत, रेलवे द्वारा छूट और बंकर ईंधन (जहाज के लिए ईंधन) की उपलब्धता सहित विभिन्न मुद्दों पर बात की।
हितधारकों को जहाजों की उपलब्धता, कार्गो हैंडलिंग और ट्रांसशिपमेंट के संबंध में वर्तमान परिचालन स्थिति से अवगत कराया गया, जिसमें कार्गो की सुगम आवाजाही के बारे में बताया गया।
सीबीआईसी के अध्यक्ष ने बंदरगाहों पर कार्गो क्लियरेंस को सुव्यवस्थित करने के लिए किये गये विभिन्न उपायों के बारे में जानकारी दी।
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