यरुशलम , फरवरी 26 -- पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध के बढ़ते खतरों के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि इस क्षेत्र के साथ भारत के हित सीधे हुड़े हुए है और क्षेत्र के मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से निकाला जाना चाहिए।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम और वहां मानवाधिकारों की स्थिति को ले कर उसके और अमेरिका के बीच टकराव की बढ़ती आशंकाओं के बीच श्री मोदी ने कहा कि भारत और दुनिया के विकासशील देश शुरू से चाहते हैं कि मसलों का समाधान संवाद और शांतिपूर्ण तरीके से हो।
प्रधानमंत्री ने इजराइल की यात्रा के दूसरे और आखिरी दिन यहां इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ साझा संवाददाता सम्मेलन में कहा, ' पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता से भारत के सीधे सुरक्षा हित जुड़े हैं। इसलिए हमने शुरुआत से ही संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है।" उन्होंने कहा कि " ग्लोबल साउथ ( विकासशील देश) और पूरी मानवता की पुकार भी यही है।"श्री मोदी ने कहा, 'भारत की सोच स्पष्ट है: मानवता कभी भी किसी लड़ाई के बीच न पिसे।" प्रधानमंत्री ने अमेरिकी पहल से गाजा क्षेत्र में शांति और विकास के लिए तय की गयी योजना के प्रति भारत के समर्थन को दोहराते हुए कहा, ' गाजा शांति योजना से शांति का एक रास्ता बना है। भारत ने इन प्रयासों का पूर्ण समर्थन किया है। भविष्य में भी हम सभी देशों के साथ संवाद और सहयोग जारी रखेंगे।"उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया के साथ भारत के सदियों पुराने आर्थिक , वाणिज्यिक , सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंध है। नये युग में भारत अपनी ऊर्जा की जरूरतों और वाणिज्यिक आदान प्रदान, माल परिवहन और कई सामरिक महत्व के मामलों में पश्चिम एशियाई देशों के साथ गहराई से जुड़ा है।
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