तेहरान/वाशिंगटन/दुबई , मार्च 11 -- ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध में मरने वालों की संख्या अब 2,100 के करीब पहुँच गई है।
ईरान की एक मानवाधिकार संस्था ने 1,262 नागरिकों और 190 सैन्य कर्मियों की मृत्यु की पुष्टि की है। इसके अलावा लेबनान में 570 से अधिक, इराक/कुर्द के 22, इजरायल के 14 (12 नागरिक, 2 सैनिक), कुवैत के 12, यूएई के 6, सऊदी अरब के तीन, बहरीन के दो और ओमान में एक नागरिक की मौत हो चुकी है।
समुद्री सुरक्षा को लेकर हालात गंभीर होते जा रहे हैं। बुधवार सुबह ही समुद्री रास्ते 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में तीन अलग-अलग मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने थाईलैंड के झंडे वाले जहाज 'मयूरी नारी' और लाइबेरियाई ध्वज वाले 'एक्सप्रेस रोम' पर हमले की जिम्मेदारी ली है। ईरान का दावा है कि इन जहाजों ने चेतावनी की अनदेखी कर अवैध रूप से जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश की थी। 'मयूरी नारी' के ऑपरेटर ने बताया कि जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और तीन चालक दल के सदस्य लापता हैं और 20 अन्य को बचा कर ओमान ले जाया गया है। तीसरे हमले की पुष्टि यूकेएमटीओ ने की है। उसके अनुसार दुबई से 50 समुद्री मील उत्तर-पश्चिम में एक अन्य जहाज को निशाना बनाया गया। इसके अलावा ओमान के मुसैंडम प्रायद्वीप के पास एक मालवाहक जहाज में आग लगने के बाद उसे खाली कराया गया।
आईआरजीसी के नौसेना प्रमुख अलीरेज़ा तंगसिरी ने स्पष्ट किया कि जो जहाज चेतावनियों को नजरअंदाज करेंगे, उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में कुल 14 जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है। ईरान के सैन्य नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर चुका है कि वे अब इस इलाके से एक लीटर तेल भी अमेरिका या इजरायल के हित के लिए नहीं गुजरने देंगे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के समुद्री सुरंग बिछाने वाले (माइनलेयर्स) 16 जहाजों पर हमला किया है। कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "अमेरिकी सेना ने 10 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 16 माइनलेयर्स सहित कई ईरानी नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया।" पोस्ट में शामिल एक वीडियो में दिखाया गया है कि नौ जहाजों पर हमला किया, जिनमें से अधिकांश हमले के समय लंगर डाले हुए प्रतीत हो रहे थे।
आईआरजीसी से संबंधित संगठन खतम अल-अंबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि अगर क्षेत्र में ईरान के आर्थिक हितों को नुकसान पहुँचाया गया, तो वे भी अमेरिका और इजरायल से जुड़े बैंकों और आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाएंगे। उन्होंने आम जनता को सलाह दी है कि वे संभावित हमलों के डर से बैंकों से कम से कम एक किलोमीटर की दूरी बनाए रखें।
ईरान ने यह भी आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजरायल ने उसके एक बैंक को निशाना बनाकर 'आर्थिक युद्ध' की शुरुआत की है। तेहरान के सैन्य कमांड ने इसे "अवैध हमला" बताते हुए कहा कि अब उनके पास जवाबी कार्रवाई के रूप में क्षेत्र के अमेरिकी आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय युद्ध में अब बिजली, बैंकिंग और संचार प्रणालियों को युद्ध का हथियार बनाया जा रहा है इसलिए ईरान गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों को निशाना बना सकता है।
जहाजों पर हमलों की खबरों के बीच वैश्विक तेल बाजार में भारी उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 4 फीसदी बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुँच गईं, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई भी 4.5 फीसदी की बढ़त के साथ 87 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। इसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने 400 मिलियन बैरल के रिकॉर्ड तेल भंडार को बाजार में उतारने का फैसला किया है। जानकारों का मानना है कि यह कदम आपूर्ति संकट को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर का स्तर भी पार कर सकती हैं।
खाड़ी देशों के बीच उड़ानों और समुद्री व्यापार का मार्ग बाधित होने से न केवल ऊर्जा बल्कि खाद्य सुरक्षा पर भी संकट मंडराने लगा है। ओमान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर रहे हैं, क्योंकि ईरान समर्थित ड्रोन और मिसाइलें लगातार उनके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर रही हैं।
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