मुंबई , मार्च 04 -- महाराष्ट्र के कृषि निर्यात को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले से शुरू हुए युद्ध ने गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है, जिससे किसान और व्यापारी भारी वित्तीय नुकसान की कगार पर हैं।
जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (जेएनपीए) में इस समय केले, अंगूर और प्याज से लदे लगभग 2,000 कंटेनर फंसे हुए हैं। इनमें नासिक जिले के प्रमुख थोक बाजारों पिंपलगांव और लासलगांव से लाए गए प्याज के लगभग 200 कंटेनर भी शामिल हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री मार्गों में आए व्यवधान ने जहाजों की आवाजाही में देरी कर दी है, जिससे बाहर जाने वाली खेप रुक गई है। निर्यातकों का कहना है कि इस स्थिति ने बंदरगाह पर 'लॉजिस्टिक बॉटलनैक' पैदा कर दिया है और यदि शिपमेंट जल्द ही नहीं रवाना किया गया, तो वस्तुओं के खराब होने का खतरा है।
संकट को बढ़ाते हुए, शिपिंग कंपनियों ने प्रति कंटेनर 2,000 अमेरिकी डॉलर से 4,000 अमेरिकी डॉलर तक का अतिरिक्त 'इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज' लगा दिया है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि इस अप्रत्याशित लागत वृद्धि ने निर्यात लागत को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा दिया है, जिससे कई सौदों में घाटा होना तय है।
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