टोक्यो, अगस्त 23 -- जापान के सबसे ऊँचे पहाड़ पर अपने बेटे को सिर्फ़ एक सॉफ्ट ड्रिंक और स्नैक के साथ कई घंटों तक अकेला छोड़ने के लिए पुलिस ने एक पिता को फटकार लगाई है। सात साल का यह बच्चा माउंट फ़ूजी पर 2,000 मीटर (6,500 फ़ीट) से ज़्यादा ऊँचाई पर, धुंध और बारिश के बीच एक बेंच पर बैठा हुआ मिला।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार जब बच्चे ने थकान की शिकायत की, तो उसके 48 वर्षीय पिता ने उससे "यहीं इंतज़ार करने" को कहा और अपने बड़े बेटे के साथ चढ़ाई जारी रखी।

पहाड़ पर बने एक हट (झोपड़ी) के कर्मचारियों को यह बच्चा चोटी की ओर जाने वाले हाइकिंग रूट के छठे स्टेशन के पास मिला और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। उसके पिता रूट के सातवें और आठवें स्टेशन के बीच मिले, जो वहाँ से तीन घंटे की चढ़ाई की दूरी पर है।

बच्चा गुरुवार को स्थानीय समयानुसार सुबह 07:30 बजे अकेला मिला।

जब पिता ऊंचे स्टेशन से लौटकर अपने बेटे से मिले तो अधिकारियों ने उन्हें खूब खरी-खोटी सुनाई। बताया जाता है कि आठ घंटे के इंतज़ार के बाद बेटा "थका हुआ और चिड़चिड़ा" हो गया था।

'जापान टुडे' के अनुसार एक अधिकारी ने उनसे कहा, "भले ही इसके लिए आपको साथ मिलकर पहाड़ पर चढ़ना छोड़ना पड़े, लेकिन बच्चे को पीछे छोड़ना मंज़ूर नहीं है।" कहा जाता है कि उन्होंने अपने इस "जल्दबाज़ी भरे" फ़ैसले के लिए माफ़ी मांगी।

बताया गया है कि परिवार फ़ुजिनोमिया रूट पर था, जो पहाड़ के पांचवें स्टेशन से शुरू होता है; इस जगह पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आसानी से पंहुचा जा सकता है।

पर्वतारोहण गाइडों का कहना है कि वहां से चोटी तक पहुंचने में लगभग पांच घंटे और नीचे उतरने में तीन घंटे और लगते हैं।

माउंट फ़ुजी, जिसकी ऊंचाई 3,776 मीटर (12,389 फ़ीट) है, हाल के वर्षों में पर्वतारोहण से जुड़ी कई दुर्घटनाओं का गवाह रहा है।

जुलाई में 99 साल की एक महिला को इस रास्ते पर चढ़ाई करने की कोशिश के दौरान गिरकर कूल्हे और पीठ में चोट लगने के बाद बचाया गया था।

इसी तरह पिछले साल विश्वविद्यालय के एक 27 साल के छात्र को, जो आधिकारिक क्लाइंबिंग सीज़न के बाहर गया था, चार दिनों में दो बार बचाया गया - क्योंकि वह अपना खोया हुआ मोबाइल फ़ोन खोजने वापस गया था।

टोक्यो के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी, माउंट फ़ूजी को 2013 में विश्व विरासत का दर्जा दिया गया था।

यह माउंट टेट और माउंट हाकू के साथ मिलकर तीन पारंपरिक "पवित्र पर्वतों" में से एक है।

हर साल लगभग दो लाख लोग इस पर चढ़ाई करते हैं, लेकिन भीड़ से बचने के लिए कुछ रास्तों पर रोज़ाना जाने वाले लोगों की संख्या सीमित रखी जाती है।

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