बारां , सितम्बर 15 -- राजस्थान में बारां में श्री जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ के श्रीचंद्रप्रभु मंदिर में चल रहे आठ दिवसीय पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व का धार्मिक कार्यक्रमों एवं आराधना के साथ मंगलवार को समापन हो गया।
इस अवसर पर क्षमावाणी पर्व की महत्ता बताते हुए समाजबंधुओं से आपसी मन-मुटाव और वैरभाव समाप्त कर एक-दूसरे से क्षमा मांगने का आह्वान किया गया।
अखिल भारतीय श्रीवर्धमान जैन नवयुवक मंडल, जावरा से आए भावेश हरण, ओजस सुराणा एवं रक्षित कोचर ने पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन कहा कि जैसे देवों में इन्द्र, तारों में चंद्रमा, तीर्थों में शत्रुंजय और मंत्रों में नवकार मंत्र श्रेष्ठ है, उसी प्रकार सर्व पर्वों में पर्वाधिराज पर्यूषण का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि क्षमावाणी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मन से वैरभाव मिटाने और संबंधों में मधुरता लाने का संदेश है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को इस अवसर पर बैर के बीज को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। जो कुछ बीत गया, उसे भुलाकर नफरत की दीवारें गिराएं और आपसी रिश्तों में प्रेम एवं विश्वास कायम करें। क्षमा मांगने और क्षमा करने से मन का बोझ हल्का होता है और समाज में सौहार्द की भावना मजबूत होती है।
चंद्रप्रभु महिला मंडल अध्यक्ष उर्मिला जैन भाया, प्रांजल बोरडिया, निर्मला बोरडिया, मोना श्रीमाल एवं पूजा श्रीमाल ने बताया कि जिन स्थानों पर साधु-संतों का चातुर्मास नहीं हो पाता, वहां जावरा के युवा धर्म की ध्वजा थामकर धार्मिक गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे हैं।
श्री वर्धमान स्वाध्यायी संघ, जावरा द्वारा पिछले कई वर्षों से विभिन्न शहरों में पर्यूषण पर्व के दौरान स्वाध्याय, धार्मिक क्रियाएं, आराधना एवं आध्यात्मिक गतिविधियां कराई जा रही हैं।
इस वर्ष संघ के 60 से अधिक युवा देश के विभिन्न शहरों में पर्यूषण पर्व के दौरान स्वाध्यायी के रूप में पहुंचे हैं।
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