अलवर , अगस्त 04 -- राजस्थान में अलवर में गणेश चतुर्थी से पहले पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति का अनूठा संदेश देने वाली पहल सामने आयी है।
नगर विकास न्यास (यूआईटी) के भूमि अवाप्ति अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका ने गाय के गोबर (गोगव्य) से भगवान गणेश की इको-फ्रेंडली प्रतिमायें तैयार करके हरित गणेशोत्सव का संदेश दिया है। उनकी इस अभिनव पहल की जिला कलक्टर डॉ आर्तिका शुक्ला ने सराहना करते हुए आमजन से इस वर्ष प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों के बजाय गोगव्य से बनी पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाओं का उपयोग करने का आह्वान किया है।
आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार का बताया कि जितेंद्र सिंह नरूका ने सोमवार को जिला कलक्टर डॉ आर्तिका शुक्ला को गोगव्य से निर्मित भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट की। इस अवसर पर डाॅ शुक्ला ने कहा कि प्राकृतिक गोबर से तैयार की गयीं ये प्रतिमाएं भारतीय परंपरा, धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर समन्वय हैं।
उन्होंने कहा कि रासायनिक रंगों और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों के विसर्जन से जलस्रोत प्रदूषित होते हैं, जबकि गोगव्य से बनी प्रतिमाएं पूरी तरह प्राकृतिक और जैव-अवक्रमणीय हैं। इससे स्वच्छ एवं हरित पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय कलाकारों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से आगामी गणेशोत्सव पर इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं का उपयोग करके पर्यावरण संरक्षण में भागीदार बनने का अनुरोध किया।
यूआईटी के भूमि अवाप्ति अधिकारी जितेंद्र सिंह नरूका ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प और जिला प्रशासन के नवाचार 'अतुल्य अलवर' अभियान से प्रेरित होकर गोबर से गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमाओं के विसर्जन से नदियों, झीलों और तालाबों का जल लगातार प्रदूषित हो रहा है। इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने इंदौर के स्वच्छता विशेषज्ञ अरशद वारसी से प्रेरणा लेकर सांचे की सहायता से घर पर ही प्राकृतिक गोबर की प्रतिमाएं तैयार कीं और उन्हें प्राकृतिक रंगों से सजाया।
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