चंडीगढ़ , दिसंबर 16 -- चंडीगढ़ में प्रशासक की सलाहकार परिषद की कला, संस्कृति, पर्यटन एवं विरासत संरक्षण संबंधी वैधानिक समिति के अध्यक्ष हरमोहिंदर सिंह लक्की ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान पर्यटन संवर्धन पर किए गए व्यय में पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि सार्वजनिक धन के उपयोग का स्पष्ट विवरण न होना चिंताजनक है।
श्री लक्की ने चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी द्वारा संसद में पूछे गए प्रश्न के उत्तर का हवाला देते हुए बताया कि पर्यटन गतिविधियों पर कुल 33.26 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें से 11.84 करोड़ रुपये कलाकारों और अन्य विक्रेताओं को भुगतान के रूप में दर्शाए गए हैं। इन भुगतानों का हालांकि कोई विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया गया। कलाकारों और विक्रेताओं के नाम, भुगतान की गई राशि, आयोजनों की प्रकृति और खर्च के परिणामों की जानकारी साझा नहीं की गई है। इसके अलावा, शेष लगभग 22 करोड़ रुपये के उपयोग पर भी कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी सार्वजनिक राशि खर्च होने पर पूर्ण पारदर्शिता और ठोस परिणाम अपेक्षित हैं। इसी को लेकर उन्होंने संस्कृति विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर उप-समिति की आपात बैठक बुलाने और खर्च की विस्तृत समीक्षा करने का अनुरोध किया है। साथ ही, पर्यटन विभाग से मदवार और वर्षवार विवरण मांगा गया है। लक्की ने स्पष्ट किया कि यदि धन का उपयोग बिना ठोस लाभ के पाया गया, तो समिति आवश्यक कार्रवाई करेगी।
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