रांची , अगस्त 19 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार की ओर से विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने की अधिसूचना जारी होने के बाद सरकार की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

श्री मरांडी ने जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द किए जाने का हवाला देते हुए पूछा कि जब सीआईडी जांच में अनियमितता मिलने के आधार पर जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते की गिरफ्तारी हो चुकी है, तो जेएसएससी के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?श्री मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का रवैया ऐसा क्यों है कि एक मामले में कार्रवाई हो रही है, जबकि दूसरे मामले में चुप्पी साधी जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या जेपीएससी और जेएसएससी के मामलों में कार्रवाई के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं।

श्री मरांडी ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं परीक्षा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा में इंटरव्यू बोर्ड को कथित तौर पर प्रभावित करने की बात परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल से जुड़े रामवीर सिंह और अभय तिवारी के कथित बयानों के माध्यम से सामने आई है। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू में अभ्यर्थियों से कथित वसूली के मामले में तत्कालीन जेपीएससी सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।

श्री मरांडी ने दावा किया कि रामवीर सिंह ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर यह बताया कि कोड डिकोड कर अभ्यर्थियों को तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष और सदस्यों के अपने-अपने इंटरव्यू बोर्ड में बुलाया जाता था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इंटरव्यू प्रक्रिया को प्रभावित किए जाने के आरोपों की जांच हो रही है, तो इंटरव्यू बोर्ड में शामिल रहे सभी लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि इंटरव्यू बोर्ड में सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक समेत कई आईपीएस अधिकारी शामिल रहे हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित होगी। मरांडी ने कहा कि यदि जांच एजेंसी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर ही सवाल उठ रहे हैं, तो मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराना जरूरी हो जाता है।

श्री मरांडी ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि इंटरव्यू प्रक्रिया में किसी तरह की हेराफेरी या मैनेजमेंट हुआ था, तो इंटरव्यू बोर्ड में शामिल रहे सभी अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए और जांच को पूरे नेटवर्क तक ले जाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली को कुछ लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित करना असली सवाल से बचने जैसा होगा। सीजीएल, सहायक आचार्य और शिक्षक भर्ती समेत पिछले वर्षों की कई परीक्षाओं में बार-बार अनियमितता और पेपर लीक के आरोप सामने आने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक व्यक्ति की करतूत नहीं, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल है।

श्री मरांडी ने कहा कि छोटे स्तर के आरोपितों पर कार्रवाई के साथ यह भी पता लगाना जरूरी है कि कथित अनियमितताओं के पीछे बड़े खिलाड़ी कौन थे, आर्थिक लेन-देन किस स्तर पर हुआ और किसने संरक्षण दिया। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर संरक्षण नहीं था, तो इतने बड़े और बार-बार होने वाले कथित घोटाले कैसे होते रहे?श्री मरांडी ने कहा कि अभ्यर्थियों की मांग है कि जांच केवल कुछ लोगों की गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे नेटवर्क और उसके कथित संरक्षकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच के लिए सीबीआई जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नौकरियों के इस कथित खेल में पैसा किसने लिया, भर्ती व्यवस्था को किसने प्रभावित किया और किस स्तर से संरक्षण मिला।

श्री मरांडी ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। भर्ती व्यवस्था में सुधार आधी-अधूरी कार्रवाई से नहीं, बल्कि पूरे मामले की जड़ तक पहुंचकर दोषियों की पहचान और कार्रवाई से ही संभव है।

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