चेन्नई , अगस्त 01 -- कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया कि वह प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के जरिये तमिलनाडु की राजनीतिक आवाज को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि यह कदम राज्य की जनता के मताधिकार का प्रभाव घटाने की साजिश है और चेतावनी दी कि इसका समर्थन करने वालों को '21वीं सदी के एट्टप्पन' के रूप में याद किया जायेगा।
यहां पत्रकारों से बात करते हुए श्री गांधी ने कहा कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया तमिलनाडु, उसके लोगों और तमिल भाषा के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है। इसके साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों से इसका विरोध करने का आह्वान किया।
श्री गांधी ने कहा, "परिसीमन विधेयक को पारित कराने की भाजपा की कोशिश में उसका समर्थन करने वाला कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति तमिलनाडु की जनता के साथ विश्वासघात कर रहा है और इतिहास उन्हें 21वीं सदी के एट्टप्पन के रूप में याद रखेगा।"उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा तमिलनाडु के राजनीतिक प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से संसद में परिसीमन कानून पारित कराने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया, "परिसीमन को तमिलनाडु की जनता के राजनीतिक अधिकार छीनने और उनकी ताकत घटाने के लिए तैयार किया गया है। यह भाजपा की साजिश है।"तमिल इतिहास और लोककथाओं में गद्दारी के प्रतीक माने जाने वाले ऐतिहासिक पात्र 'एट्टप्पन' का उल्लेख करते हुए श्री गांधी ने कहा कि प्रस्तावित प्रक्रिया का समर्थन करने वाले लोग राज्य के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "जो कोई भी परिसीमन का समर्थन कर रहा है, वह तमिलनाडु और उसके भविष्य के साथ विश्वासघात कर रहा है तथा आरएसएस और भाजपा को तमिलनाडु के लोगों व इसके भविष्य पर हमला करने की अनुमति दे रहा है।"कांग्रेस नेता ने तमिलनाडु के प्रत्येक निवासी से इस प्रस्ताव को खारिज करने की अपील की और क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय दोनों राजनीतिक दलों से संसद में इस विधेयक को हराने का आग्रह किया।
श्री गांधी ने जोर देकर कहा, "किसी भी तमिल व्यक्ति को परिसीमन का समर्थन नहीं करना चाहिए। तमिलनाडु के हर एक नागरिक को परिसीमन का विरोध करना चाहिए। हर तमिल या राष्ट्रीय दल को सदन में परिसीमन को हराना चाहिए।"परिसीमन का मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। दक्षिण के कई राज्यों ने यह चिंता व्यक्त की है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के बावजूद, अद्यतन जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन से लोकसभा सीटों में उनका हिस्सा घट सकता है। भाजपा का रुख हालांकि यह रहा है कि भविष्य में कोई भी परिसीमन प्रक्रिया संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही आयोजित की जायेगी।
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