लखनऊ, 19 सितंबर (वार्ता ) उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में विकसित करने की दिशा में 300 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। शासन ने इसके लिए वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति जारी करते हुए स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना के लिए तकनीकी मानक भी निर्धारित किए हैं।

बेसिक शिक्षा अनुभाग-5 के विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी की ओर से राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा को भेजे गए पत्र के माध्यम से यह जानकारी सामने आई है। इस आदेश को लेकर अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना के लिए प्रस्तावित 300 करोड़ रुपये की धनराशि को व्यय किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

उन्होंने बताया कि शासनादेश के अनुसार इस पूरी धनराशि का उपयोग स्वीकृत तकनीकी विशिष्टताओं और प्रावधानों के तहत किया जाएगा। स्मार्ट क्लास की स्थापना के लिए विद्यालयों में न्यूनतम 65 इंच का इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल लगाया जाएगा। इसमें 4के यूएचडी रिजॉल्यूशन और एंटी-ग्लेयर टफेंड ग्लास की सुविधा होगी।

पैनल में नवीनतम संस्करण का एंड्रॉयड या टाइजन ऑपरेटिंग सिस्टम, कम से कम 8 जीबी रैम और 512 जीबी आंतरिक स्टोरेज निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही कम से कम 20-प्वाइंट मल्टी-टच क्षमता, इन-बिल्ट स्पीकर, वायरलेस कास्टिंग और एनोटेशन टूल भी अनिवार्य किए गए हैं।

स्मार्ट क्लास के लिए इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल के साथ ओपीएस स्लॉट और ओपीएस पीसी की व्यवस्था भी होगी। ओपीएस पीसी में कम से कम इंटेल आई5 या राइजेन 5 अथवा उससे बेहतर प्रोसेसर, 8 जीबी रैम और 512 जीबी एसएसडी का प्रावधान किया गया है। शासन ने संबंधित अधिकारियों को स्वीकृत धनराशि का उपयोग निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार करते हुए परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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