नयी दिल्ली , सितंबर 01 -- केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने मंगलवार को कहा कि परिवार समाज की आधारशिला हैं और रामकृष्ण मिशन के साथ सहयोग बच्चों, माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी को साथ रहने के महत्व को फिर से समझने में मदद करेगा।
डॉ कुमार ने आज यहां सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (डीओएसजेई) के रामकृष्ण मिशन (आरकेएम) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये जाने के मौके पर कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए हर पीढ़ी को साथ चलना होगा, जो 'सबका साथ, सबका विकास' की सच्ची भावना है। समझौता ज्ञापन पर डॉ कुमार, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा, डीओएसजेई के संयुक्त सचिव सजीश कुमार एन.,डीओएसजेई की निदेशक काजल सिंह और आरकेएम के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद के साथ-साथ दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये गये।
इस मौके पर डॉ कुमार ने कहा कि समझौते का उद्देश्य 'पीढ़ियों के बीच आपसी रिश्तों को लागू करना है। यह एक देशव्यापी पहल है, जिसका मकसद स्कूल प्रणाली के ज़रिए बच्चों, माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव मज़बूत करना है। एमओयू पर हुए हस्ताक्षर बुजुर्गों के सम्मान और हर पीढ़ी के समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि देश को आगे बढ़ाने के लिए हर पीढ़ी को साथ चलना होगा, जो 'सबका साथ, सबका विकास' की सच्ची भावना है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार देश भर में पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। रामकृष्ण मिशन के साथ एमओयू एक ऐसा मॉडल बनाने में मदद करेगा, जिसे दोहराया जा सकता हो और जो हमारे स्कूलों के माध्यम से तीन पीढ़ियों को एक-दूसरे के करीब लाता हो।
रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद ने इस मौके पर कहा कि रामकृष्ण मिशन शिक्षा और चरित्र-निर्माण के माध्यम से सेवा में विश्वास करता है। मिशन को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के साथ साझेदारी करने में खुशी है, ताकि परिवारों को अपने बुजुर्गों की समझदारी को फिर से जानने और साझा मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल सके।
डीओएसजेई के संयुक्त सचिव सजीश कुमार एन. ने इस पहल के लिए विभाग के दृष्टिकोण को रेखांकित किया और परिवार की भागीदारी के स्थायी, स्कूल-आधारित मॉडल बनाने की दिशा में एक कदम के रूप में रामकृष्ण मिशन के साथ सहयोग का स्वागत किया।
इस एमओयू के तहत देश के चार क्षेत्रों के 50 प्रतिनिधि स्कूलों में गंभीर अध्ययनों के माध्यम से आधुनिक परिवारों के सामने पीढ़ियों से संबंधित चुनौतियों पर शोध किया जायेगा। इसमें स्कूलों में इस्तेमाल के लिए सबूत-आधारित 20 'सह-शिक्षा ज्ञान प्राप्ति खेल का डिज़ाइन, पायलट-परीक्षण और उन्हें अंतिम रूप देना भी शामिल है।
शिक्षकों को सत्र आयोजित करने में मदद करने के लिए एक द्विभाषी (अंग्रेजी-हिंदी) संसाधन केंद्र वेबसाइट विकसित की जायेगी। इस पहल में शिक्षकों के लिए प्रमाणपत्र प्रशिक्षण और देश भर के 200 पायलट स्कूलों में सह-शिक्षा ज्ञान प्राप्ति खेल सत्रों की शुरुआत भी शामिल होगी। एक स्वतंत्र मूल्यांकन अध्ययन इस पहल के परिणामों का आकलन करेगा और देश भर में इसे बड़े पैमाने पर लागू करने के बारे में जानकारी देगा।
यह पहल मंत्रालय के मौजूदा वरिष्ठ नागरिक कल्याण पारितंत्र , जिसमें 'अटल वयो अभ्युदय योजना' (एवीवाईएवाई) भी शामिल है, पर आधारित है। इसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि बुजुर्ग अपनी समझ और मूल्य अगली पीढ़ी को सौंप सकें, माता-पिता परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का काम कर सकें, और बच्चे अपनी संस्कृति से जुड़े रहते हुए और भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करते हुए बड़े हो सकें।
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