छिंदवाड़ा , सितंबर 21 -- मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा जिले के परासिया में कोल्ड्रिफ सिरप प्रकरण के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शिवपुरी गांव में आठ वर्षीय बच्चे की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। मिट्टी टोला में मजदूरी करने वाले हरिद्वार उईके के दो बेटे वेदांत और अयांश कुछ दिनों से बीमार थे। परिवार ने पहले स्थानीय स्तर पर उपचार कराया। हालत बिगड़ने पर दोनों को परासिया के सरकारी अस्पताल लाया गया, जहां से वेदांत को छिंदवाड़ा ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। अयांश को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने शव का पोस्टमार्टम कराया। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने बच्चे की बीमारी या मौत के कारण को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

बीएमओ डॉ. अंकित सहलाम के निर्देश पर सोमवार को डॉ. कय्यूम के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम शिवपुरी पहुंची। टीम में कुष्ठ समन्वयक रेवाराम और वैक्सीन सहायक ओरेहा शामिल रहे। बाघबर्घिया के एमपीडब्ल्यू शंकर ठाकुर भी टीम के साथ पहुंचे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और एएनएम ने भी परिवार से जानकारी ली।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया तथा पानी सहित अन्य नमूने लिए। घरों में जमा पानी में मच्छरों के लार्वा की भी तलाश की गई। टीम सोमवार शाम करीब चार बजे वापस लौटी। अभी तक बच्चे की मौत को डेंगू या किसी अन्य बीमारी से जोड़ने वाली कोई पुष्ट रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार परासिया में बाल रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। कोल्ड्रिफ सिरप प्रकरण में डॉ. प्रवीण सोनी, डॉ. एसएस ठाकुर और डॉ. अमन सिद्दीकी के जेल में होने के बाद परासिया में बाल रोग विशेषज्ञों की नियमित उपलब्धता प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी आबादी और बच्चों की संख्या वाले क्षेत्र में सरकारी स्तर पर नियमित शिशु रोग विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने से गंभीर स्थिति में परिजनों को दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है।

बाल रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था की मांग को लेकर पूर्व विधायक ताराचंद बावरिया ने स्वास्थ्य मंत्री से पत्राचार और ज्ञापन देने की बात कही है। कांग्रेस विधायक सोहन बाल्मिक ने भी अस्पताल के सामने एक दिन का अनशन किया था। इसके बाद सीएमएचओ कार्यालय की ओर से छिंदवाड़ा के तीन चिकित्सकों को सप्ताह के अलग-अलग दिनों में परासिया अस्पताल में सेवाएं देने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि स्थानीय स्तर पर दावा है कि यह व्यवस्था नियमित रूप से प्रभावी नहीं हो सकी।

स्थानीय लोगों के अनुसार डॉ. एलएन साहू, डॉ. सुदेश नागवंशी सहित तीन चिकित्सकों की परासिया में ड्यूटी लगाई गई थी। मई से सितंबर के बीच इन चिकित्सकों के नियमित रूप से अस्पताल नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। पूर्व विधायक ताराचंद बावरिया ने डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर सीएमएचओ को धरने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद एक दिन डॉक्टर के पहुंचने की बात सामने आई, लेकिन नियमित व्यवस्था फिर शुरू नहीं हो सकी।

परासिया क्षेत्र में डब्ल्यूसीएल के चिकित्सकों से सप्ताह में तीन दिन बच्चों का उपचार कराने की व्यवस्था की घोषणा भी की गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार यह व्यवस्था भी प्रभावी नहीं हो सकी और बच्चों को नियमित बाल चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई।

वेदांत की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में मच्छरों और लार्वा की भी जांच की। एक ओर विभाग बीमारी के कारणों की जांच कर रहा है, वहीं स्थानीय लोग लंबे समय से चली आ रही बाल रोग विशेषज्ञों की कमी को लेकर सवाल उठा रहे हैं। बच्चे की मौत का वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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