आइची-नागोया (जापान) , सितंबर 27 -- भारतीय मुक्केबाज परवीन हुड्डा ने रविवार को एशियाई खेलों में महिलाओं के 65 किग्रा भार वर्ग की स्पर्धा के क्वार्टरफाइनल में उज्बेकिस्तान की नवबखोर खमिदोवा को 5-0 से से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। वहीं अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। इसी के साथ इन दोनों मुक्केबाजों ने अपने-अपने पदक पक्के कर लिये है। आज यहां परवीन हुड्डा ने महिलाओं के 65किग्रा वर्ग के क्वार्टरफाइनल में नवबखोर खमिदोवा पर शानदार 5-0 से जीत हासिल करके एशियन गेम्स में अपनी पिछली निराशा को पीछे छोड़ कर अपना पदक पक्का कर लिया। डोपिंग उल्लंघन के कारण परवीन का 2022 हांग्जो एशियन गेम्स का कांस्य पदक छीन लिया गया था, लेकिन उन्होंने एक बार फिर अपने लिए पदक हासिल कर लिया है। खमिदोवा की एकमात्र उम्मीद इस मुक़ाबले को ज़बरदस्त टक्कर वाले मुक़ाबले में बदलने की थी और वह तेज़ी से आगे बढ़ीं, लेकिन परवीन ने एक बार फिर दूरी बनाए रखी और फिर तेजी से हमला करते हुए कुछ बॉडी शॉट्स और चेहरे पर जैब्स मारे, और फिर पीछे हट गईं।

उज्बेकिस्तान की मुक्केबाज ने अपनी रणनीति बदली और कुछ काउंटर-पंच मारने के लिए पीछे रहीं, लेकिन जब परवीन ने खुद हमला किया तो उनकी स्पीड और पहुंच उनके काम आई और उन्होंने आसानी से कुछ हिट्स किए। अंत में काफ़ी हलचल रही, लेकिन परवीन ने मेडल जीतने के लिए बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और परवीन 5-0 से जीतीं और सेमीफाइनल में पहुँच गईं।

फाइनल में पहुंचना परवीन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि संभावना है कि उनका मुकाबला कजाकिस्तान की आइदा अबिकेयेवा से होगा, जो मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन हैं। चीन की ली शू ने क्वार्टरफाइनल में अबिकेयेवा को हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया है और अब सेमीफाइनल में परवीन से भिड़ेंगी।

इससे पहले वहीं शानदार फॉर्म में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बनाकर रविवार को एशियाई खेलों में भारत के लिए पहला बॉक्सिंग मेडल पक्का कर लिया। एशियाई खेलों में अपना पहला मुकाबला खेल रहे हरियाणा के 21 वर्षीय बॉक्सर ने क्वार्टर फाइनल में ताजिकिस्तान के नेक्रुज़ सलीमोव को 5-0 से हराकर परिपक्व और नियंत्रित खेल दिखाया।

अंकुश ने मुकाबले की शुरुआत से ही अपनी पकड़ बनाए रखी; उन्होंने तेज़ फुटवर्क के साथ सटीक सीधे पंच और सही समय पर काउंटर-पंच का इस्तेमाल किया। उन्होंने मुकाबले की दूरी को अपने हिसाब से तय किया और सलीमोव को अपनी लय में नहीं आने दिया।

पहले दो राउंड में स्पष्ट बढ़त बनाने के बाद, अंकुश ने आखिरी राउंड में भी शानदार संयम दिखाया। जल्दबाजी में उलझने के बजाय, उन्होंने समझदारी से मुकाबला खेला, अपने प्रतिद्वंद्वी को दूर रखा और अपनी बढ़त को बचाए रखते हुए सर्वसम्मत निर्णय से जीत हासिल की। इस जीत से अंकुश का कम से कम कांस्य पदक पक्का हो गया है और इससे आइची-नागोया में भारत के बॉक्सिंग अभियान को शुरुआती बढ़त मिली है।

यह युवा बॉक्सर के लिए हाल के शानदार सफर में एक और महत्वपूर्ण कदम है। अंकुश 80 किग्रा वर्ग में कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक जीतकर जापान पहुंचे थे और अब उन्होंने उसी आत्मविश्वास को एशियाई मंच पर भी बरकरार रखा है।

उन्होंने राउंड ऑफ़ 16 में बहरीन के हम्सा वोगेल पर 5-0 की शानदार जीत के साथ एशियाई खेलों में अपने अभियान की शुरुआत की थी। प्रतियोगिता में दो मुकाबले खेलने के बाद भी अंकुश ने अभी तक एक भी राउंड नहीं गंवाया है, जो उनके अभियान में निरंतरता और नियंत्रण को दर्शाता है।

भारतीय बॉक्सर की यह सफलता उस बॉक्सिंग टीम के लिए और भी महत्वपूर्ण है जो इन खेलों में अपनी छाप छोड़ने की कोशिश कर रही है। भारत का अभियान पूरा होने से पहले ही उनका मेडल पक्का होना, प्रतियोगिता में बने हुए अन्य भारतीय बॉक्सरों का भी हौसला बढ़ाता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित