मोहाली , अक्टूबर 13 -- पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने मंगलवार मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने पर दुख जताते हुए राज्य की भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना ने सरकार के नशा विरोधी अभियान और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

श्री सिद्धू ने कहा कि नशों के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवक की हत्या सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है। उन्होंने पूछा कि जब नशा विरोधी कार्यकर्ता ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने कहा कि सरकार की 'युद्ध नशों के विरुद्ध' मुहिम की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। नशों का खात्मा केवल नारों, विज्ञापनों और राजनीतिक बयानों से नहीं हो सकता। इसके लिए नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पुलिस प्रशासन की जवाबदेही और नशों के खिलाफ संघर्ष करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

कांग्रेस नेता ने संगरूर जिले के शेरों गांव के युवक मोहनजीत सिंह के मामले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के जनमिलनी कार्यक्रम के दौरान नशों के मुद्दे पर आवाज उठाने वाले युवक के साथ पुलिस की कथित मारपीट लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

श्री सिद्धू ने गुलजार सिंह के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुलजार सिंह का बेटा नशे की लत से जूझ रहा था और वह नशों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। सिद्धू के अनुसार, गुलजार सिंह ने आरोप लगाया था कि उन्हें इतना परेशान किया गया कि उन्होंने सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने इस मामले में आम आदमी पार्टी के मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर लगाए गए कथित धमकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की।

उन्होंने कहा कि सरकार को इन घटनाओं से सबक लेते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नशों के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी भी व्यक्ति को डर या दबाव का सामना न करना पड़े। उन्होंने परविंदर झोटा हत्याकांड की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों को सख्त सजा दिलाने और नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक प्रचार के बजाय नशों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

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