ईटानगर , जुलाई 19 -- अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के. टी. परनाइक ने रविवार को युवाओं से पूर्वोत्तर की स्वदेशी ज्ञान प्रणाली, पारंपरिक पर्यावरणीय समझ और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ-साथ एक विकसित भारत के दृष्टिकोण में सक्रिय रूप से योगदान देने का आह्वान किया।
श्री परनाइक ने गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी 'परंपरा से परिवर्तन: आधुनिक शासन में भारतीय इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा का एकीकरण' में कहा कि भारत की असाधारण सभ्यता की यात्रा ज्ञान, नवाचार, नैतिक नेतृत्व और सामाजिक सद्भाव से निर्देशित रही है। 17 जुलाई से शुरू हुई यह तीन दिवसीय संगोष्ठी भारतीय इतिहास संकलन समिति, असम और अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना द्वारा आयोजित की गयी थी।
श्री परनाइक ने कहा कि तक्षशिला और नालंदा के प्राचीन शिक्षण केंद्रों से लेकर आज के अनुसंधान और नवाचार संस्थानों तक, भारत अपने शाश्वत मूल्यों से जुड़े रहकर लगातार आगे बढ़ा है। संगोष्ठी के विषय को भारत की प्रगति का प्रतिबिंब बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश के परिवर्तन ने हमेशा अपनी समृद्ध विरासत और स्थायी सभ्यतागत ज्ञान से ताकत हासिल की है। उन्होंने युवाओं से पिछली पीढ़ियों से विरासत में मिले ज्ञान, मूल्यों और समझ को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत के दृष्टिकोण में तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास के साथ-साथ ईमानदारी, कर्तव्य, स्थिरता और सामाजिक जिम्मेदारी का समावेश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति हर नागरिक के कल्याण और सशक्तीकरण में निहित है।
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