नयी दिल्ली , फरवरी 23 -- भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने के लिए पनडुब्बी रोधी युद्धपोत 'अंजदीप' को 27 फरवरी को नौसेना के बेड़े में शामिल किया जायेगा। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि अंजदीप आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों के निर्माण की परियोजना का तीसरा युद्धपोत है और इसे 27 फरवरी को चेन्नई बंदरगाह पर पूर्वी नौसेना कमान में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा।
इस समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी करेंगे।
यह परियोजना 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में देश की तेज प्रगति और स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन तथा निर्माण की सफलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। कोलकात्ता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा निर्मित, अंजदीप एक अत्याधुनिक पोत है जिसे विशेष रूप से तटीय युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह युद्धपोत तटीय और उथले जल क्षेत्र में राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इस युद्धपोत को 'डॉल्फिन हंटर' के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है। स्वदेशी, अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी हथियारों और सेंसर पैकेज से सुसज्जित इस युद्धपोत में हल माउंटेड सोनार अभय , हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेट भी लगाये गये हैं। अपनी प्राथमिक पनडुब्बी रोधी भूमिका के अलावा, यह फुर्तीला और अत्यधिक करतबबाजी करने में सक्षम है और साथ ही तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान और खोज एवं बचाव अभियान भी चला सकता है। सत्ततर 77 मीटर लंबे इस पोत में एक उच्च गति वाला वाटर-जेट प्रोपल्सन प्रणाली है, जो इसे त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर संचालन के लिए 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
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