नैनीताल , सितंबर 03 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऊधमसिंह नगर के सितारगंज तहसील के अरविंद नगर की क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) सदस्य विनीता विश्वास को बड़ी राहत देते हुए उनकी सदस्यता को अवैध घोषित करने की मांग वाली विशेष अपील को खारिज कर दिया।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पति द्वारा स्वयं को पंचायत सदस्य के रूप में प्रस्तुत करना मात्र पत्नी की सदस्यता को अयोग्य ठहराने का आधार नहीं बन सकता। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में एक सितंबर को हुई। अदालत ने इसी आधार पर निखिलेश घरामी की अपील को खारिज कर दिया।
दरअसल अपील में एकलपीठ के 24 जुलाई 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें विनीता विश्वास की बीडीसी सदस्यता को उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 की धारा 53 का हवाला देते हुए शून्य घोषित करने की मांग की गयी थी।
एकलपीठ ने पाया कि यह साबित नहीं होता है कि प्रतिवादी विनीता विश्वास के पति ने उनके स्थान पर किसी बैठक में भाग लिया हो या क्षेत्र पंचायत सदस्य के किसी आधिकारिक कर्तव्य का निर्वहन किया हो। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वह स्वयं को क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
एकलपीठ ने कहा कि उक्त कथित कदाचार धारा 53 के दायरे में नहीं आता है। इसी आधार पर एकलपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।
इसके बाद श्री घरामी ने इस आदेश को खंडपीठ में विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी लेकिन खंडपीठ ने अपील को खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को बरकरार रख दिया।
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