मुंबई , मई 30 -- दैनिक उपभोग, पर्सनल केयर और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं का कारोबार करने वाली प्रमुख कंपनी पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने खरेलू उपभोक्ता मांग के मजबूत रुझानों के बल पर 31 मार्च, 2025 को समाप्त वित्त वर्ष 2025-26 में की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष में परिचालन से अब तक का सबसे अधिक राजस्व दर्ज किया है।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की अवधि के लिए कंपनी का परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 18.99 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रिकार्ड 40,169.58 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान कुल परिचालन लाभ (असाधारण मदों को छोड़कर) 1,931.52 करोड़ रुपये रहा रहा।
कंपनी ने शनिवार शाम जारी वार्षिक और तिमाही वित्तीय रिपोर्ट में कहा कि गत 31 मार्च को समाप्त तिमाही में उसका परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 17.28 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 11,155.60 करोड़ रुपये रहा। तिमाही-दर-तिमाही आधार पर राजस्व में 6.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी तिमाही में त्वरित उपभोक्ता (एफएमसीजी खंड) में कंपनी की परिचालन आय 2,890.46 करोड़ रुपये रही।
चौथी तिमाही में खाद्य तेल कारोबार में आय सालाना आधार पर 23.28 प्रतिशत और तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 13.47 प्रतिशत बढ़कर 8,324.11 करोड़ रुपये हो गयी। कंपनी ने बिक्री की मात्रा में बढ़ोतरी को राजस्व वृद्धि का मुख्य आधार बताया। मार्च 2026 में समाप्त तिमाही में कंपनी ने सकल लाभ मार्जिन 12.47 रहा, परिचालन लाभ का मार्जिन 4.48 प्रतिशत (असाधारण मदों को छोड़कर), और शुद्ध लाभ मार्जिन 2.10 प्रतिशत दर्ज किया।
मार्च 2026 तक पातंजलि का पाम ऑयल बागान का कुल रकबा 1,10,722 लाख हेक्टेयर था।
कंपनी की विज्ञप्ति में कहा गया है कि 21 अप्रैल 2026 को हुई अपनी बैठक में उसके निदेशक मंडल ने 2025-26 के लिए, 2 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 1.75 रुपये का दूसरा अंतरिम लाभांश घोषित किया है। इसके साथ ही 20225-26 के लिए घोषित कुल लाभांश बढ़कर 3.50 रुपये प्रति इक्विटी शेयर हो गया है।
कंपनी ने कहा है कि मार्च तिमाही के दौरान घरेलू खपत के मजबूत रुझान जारी रहा।जीएसटी लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था में आई लगातार सुधार की स्थिति से मदद मिली तथा खुदरा महंगाई दर काफी हद तक नियंत्रण में रही । ग्रामीण क्षेत्रों में कंपनी मांग स्थिर बनी रही, जिसका मुख्य कारण अच्छी फसल का मौसम और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लगातार क्रियान्वयन था, जिससे लोगों की खर्च योग्य आय में वृद्धि हुई। शहरी मांग में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई, विशेष रूप से प्रीमियम श्रेणियों में।
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