भिण्ड , सितंबर 18 -- मध्यप्रदेश के भिण्ड जिले में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी के भूखंडों की रजिस्ट्री का काम पटवारियों के विरोध के कारण शुरू नहीं हो सका। रजिस्ट्री गुरुवार से शुरू होनी थी, लेकिन जिले के किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई। योजना के नोडल अधिकारी एवं अपर कलेक्टर (एडीएम) राजन बी. नाडिया ने इसकी पुष्टि की है।
स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री के दस्तावेजों में पटवारी का नाम दर्ज किया जा रहा है। पटवारियों का कहना है कि भविष्य में इन भूखंडों को लेकर कोई विवाद होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। पटवारियों की मांग है कि रजिस्ट्री के दस्तावेजों में उनका नाम दर्ज न किया जाए। इसके स्थान पर दस्तावेज में 'मध्यप्रदेश शासन' का नाम लिखा जाए। उनका कहना है कि जब रजिस्ट्री शासन के निर्देश पर हो रही है तो इसकी जिम्मेदारी भी शासन की होनी चाहिए।
राजस्व विभाग के मुख्य सचिव की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि स्वामित्व योजना से जुड़े विवादों में पटवारियों को दूर रखा जाएगा। इसके बावजूद पटवारी इस व्यवस्था से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि केवल भविष्य के विवादों से दूर रखने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है और रजिस्ट्री के दस्तावेजों में भी उनका नाम नहीं होना चाहिए।
इसी मांग को लेकर पिछले दिनों पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष विनायक सिंह तोमर के नेतृत्व में 200 से अधिक पटवारियों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया था। इसके बाद शुरू होने वाली रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी पटवारियों ने हिस्सा नहीं लिया।
भिण्ड जिले में स्वामित्व योजना के तहत 1 लाख 29 हजार 64 भूखंडों की रजिस्ट्री प्रस्तावित है। इनमें 1 लाख 89 हजार 948 लोगों के अधिकारों का अभिलेखीकरण किया जाना है। इसके लिए करीब 450 पटवारियों को काम सौंपा गया था। योजना के तहत ग्रामीण आबादी की जमीन पर वर्षों से रह रहे लोगों को उनके भूखंडों का कानूनी अधिकार देने की प्रक्रिया चल रही है। कई मामलों में ग्रामीणों के पास अभी केवल कब्जे का अधिकार है।
वही दस्तावेज मिलने के बाद भूखंडों की खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में सुविधा मिलने की उम्मीद है। योजना के नोडल अधिकारी एवं एडीएम राजन बी. नाडिया ने बताया कि जिले में योजना के तहत अभी कोई रजिस्ट्री नहीं हुई है। रजिस्ट्री नहीं होने के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है।
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