पटना , सितंबर 10 -- टना विश्वविद्यालय में छात्रों की दस सूत्री मांगों को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज चौथे दिन भी जारी रहा। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चिकित्सकों की टीम ने उनकी मेडिकल जांच की।आज एआईएसएफ के द्वारा पटना विश्वविद्यालय बंद का आह्वान किया गया था, जिसका समर्थन पटना विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ ने भी किया। आज सुबह से ही भूख हड़ताल स्थल पर छात्रों का जमावड़ा लगने लगा था। इसके बाद तमाम छात्रों ने पटना विश्वविद्यालय के तमाम कॉलेजों को बंद किया, जिसे विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों का भरपूर समर्थन मिला।

छात्रों ने पटना आर्ट कॉलेज, बी.एन. कॉलेज, पटना कॉलेज, दरभंगा हाउस, वाणिज्य महाविद्यालय, साइंस कॉलेज सहित तमाम कॉलेजों और कार्यालयों को बंद करवाया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र क्लास रूम से निकलकर भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचे और अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।

इस अवसर पर एआईएसएफ के पूर्व नेता निखिल झा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पटना विश्वविद्यालय के कुलपति छात्रों और विश्वविद्यालय के साथ तानाशाहीपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र अपने संघर्ष के माध्यम से कुलपति को झुकने के लिए मजबूर करेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय की एडमिशन नियमावली में प्रस्तावित बदलाव पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय के छात्र ही शिक्षा से दूर हो जाएंगे।

भूख हड़ताल को समर्थन देने पहुंचे एआईवाईएफ बिहार राज्य के सचिव संभू देवा ने कहा कि विश्वविद्यालय को बंद कर निजी हाथों में सौंपने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही फीस वृद्धि के कारण गरीब तबके से आने वाले छात्र बढ़ी हुई फीस का भुगतान नहीं कर पाएंगे और शिक्षा से दूर हो जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति छात्रों और कर्मचारियों से संवाद नहीं कर रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय की समस्याएं और गंभीर हो रही हैं।

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