पटना , जुलाई 22 -- बिहार में राजधानी पटना की सड़कों पर बुधवार को हजारों छात्रों ने अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा) के बैनर तले कथित परीक्षा अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के खिलाफ कार्रवाई तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को सामने रखते हुए प्रदर्शन किया।छात्रों का गांधी मैदान से मार्च के रूप में शुरू हुआ प्रदर्शन उस समय हिंसक हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने बिहार विधानमंडल की ओर बढ़ने का प्रयास किया। लौरिया के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक विनय बिहारी ने बिहार विधानसभा में सूचना के तहत कहा कि जब वह सदन की दूसरे हॉफ की कार्यवाही में शामिल होने आ रहे थे तो प्रदर्शकारियों ने उनकी गाड़ी की खिड़की का शीशा तोड़ दिया और वह अंगरक्षकों की मदद से बाल बाल बच गए। विधानसभा अध्यक्ष ने इस सम्बंध में उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया।

इसके बाद प्रदर्शकारियों ने सचिवालय क्षेत्र की ओर बढ़ने की कोशिश की।

उधर विधानसभा परिसर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई और एहतियात के तौर पर बिहार विधानसभा तथा बिहार विधान परिषद के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए।

पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग की थी। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिससे उनकी सुरक्षा बलों के साथ झड़प हो गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, फिर आंसू गैस के गोले छोड़े और अंततः लाठीचार्ज किया।

इस पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारियों के कुछ समूह सचिवालय के निकट बेली रोड तक पहुंच गए, जहां उन्होंने सड़क जाम कर दी। इसके कारण राजधानी के कई इलाकों में भीषण यातायात जाम लग गया। प्रमुख सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं, जिससे व्यस्त समय में सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ।

डाकबंगला चौराहा के पास मौजूद वरिष्ठ जिला एवं पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने पीछे हटने से इनकार करते हुए अपनी मांगों पर कार्रवाई की जिद बनाए रखी।

प्रदर्शनकारियों के विधानमंडल परिसर की ओर बढ़ने के बाद प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी। विधानसभा परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया तथा एहतियातन बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए।

प्रदर्शन के कारण कुछ समय तक विधानमंडल परिसर और उसके आसपास आवाजाही पर कड़ी पाबंदी रही।

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने डाकबंगला चौराहा पर भाजपा के एक विधायक का भी रास्ता रोक दिया, जिससे उन्हें वापस लौटना पड़ा।

प्रदर्शन की कवरेज कर रहे मीडिया कर्मियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार की भी खबरें सामने आईं। कुछ पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की गई, जबकि एक पत्रकार के घायल होने की भी सूचना है।

आइसा और प्रदर्शन में शामिल अन्य छात्र संगठनों ने कहा कि यह आंदोलन कथित प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं, शिक्षा के निजीकरण को लेकर चिंताओं तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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