जयपुर , सितंबर 26 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने प्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव में चुने गये सभी नव निर्वाचित पार्षदों, महापौर, अध्यक्ष, उपमहापौर और उपाध्यक्षों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि आशा है पक्ष-विपक्ष आपस में मिलकर जनता की परेशानियों और मुद्दों को हल करेंगे।
प्रदेश में शनिवार को नगरीय निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद श्री गहलोत ने यह बात कही। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अफसोस है कि जिस तरह का चुनाव इस बार राजस्थान में हुआ है उसमें अनैतिकता की सारी हदें सत्ताधारी भाजपा ने पार कर दी। पहले मनमर्जी का परिसीमन किया जिसमें कांग्रेस समर्थित तीन-चार वार्डों को मिलाकर एक कर दिया और भाजपा समर्थक इलाकों में एक वार्ड को दो-तीन वार्डों में बांट दिया। इस हद तक बेईमानी की गयी कि पति-पत्नी के वोट, एक ही घर में रहने वाले एक ही परिवार के सदस्यों के वोट अलग-अलग वार्ड में बंट गये। इतना ही नहीं, इसके बाद भी एक साल तक चुनावों को टालते रहे। तत्पश्चात उच्च न्यायालय की फटकार के बाद चुनाव करवाने को मजबूर हुए। महापौर और अध्यक्ष के चुनावों के लिए पुलिस, प्रशासन और धनबल का निर्लज्ज दुरुपयोग किया गया।
उन्होंने कहा कि जनता कह रही है कि इस बार भाजपा के नहीं सरकारी बाहुबल और धनबल के मेयर और चेयरमैन बने हैं। कई जगहों पर कांग्रेस ने ज्यादा वोट प्राप्त किये परन्तु गलत तरीके से किये गये परिसीमन के कारण हमारे पार्षदों की संख्या कम रही। आजादी के बाद इन चुनावों में पहली बार सत्ता और धनबल का ऐसा दुरुपयोग राजस्थान में हुआ जो चिंताजनक और दुखदायी है। यह सभी मतदाताओं, विशेषकर पहली बार वोट डालने वाले युवाओं (जेन-जी) के लिए भी चिंता का विषय है।
श्री गहलोत ने कहा कि जब नये मेयर या सभापति बनते हैं तो शहरवासियों में एक स्वाभाविक उत्साह होता है कि शहर को प्रथम नागरिक मिला है लेकिन इस बार वो बात नदारद है और इसका कारण यही है कि जनादेश का सम्मान नहीं हुआ है। जनता में यह धारणा बन गयी है कि भाजपा ने धनबल के आधार पर मेयर, चेयरमैन बनाये हैं और भाजपा अब निकायों को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
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