कोलकाता , जून 22 -- पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को राज्य में "सिंडिकेट चार्ज" और ज़बरदस्ती अनुदान संस्कृति को रोकने के लिए एक कानून बनाने की घोषणा की , जिसका उद्देश्य मकसद ज़बरदस्ती की स्थनीय शुल्क से निपटना और व्यापार और निर्माण गतिविधि के लिए माहौल को बेहतर बनाना है।

प्रदेश के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि प्रस्तावित कानून से स्थानीय गिरोह और संगठनों द्वारा निवासियों, व्यापारियों, बिल्डरों और ठेकेदारों पर कथित तौर पर लगाये गये बिना इजाज़त कलेक्शन पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत त्योहारों, क्लब इवेंट्स, निर्माण कार्याे और दूसरी स्थानीय गतिविधियों के दौरान लोगों, व्यापारियों और ठेकेदारों से कथित तौर पर ज़बरदस्ती "पैसा" लेने के तरीके पर भी रोक लगाने की कोशिश की जायेगी।

यह घोषणा इसलिए ज़रूरी है क्योंकि पिछले महीने राज्य में सत्ता में आयी भाजपा सरकार ने बार-बार कहा है कि जबरन वसूली नेटवर्क और जिसे वह मौजूदा "थ्रेट कल्चर" कहती है, उसे खत्म करना उसकी मुख्य सरकारी प्राथमिकताओं में से एक होगा।

श्री दासगुप्ता ने हालांकि प्रस्तावित कानून के प्रावधानों के बारे में नहीं बताया, लेकिन उम्मीद है कि इस कदम से निर्माण गतिविधि , बिल्डिंग सामग्री की आपूर्ति और ज़बरदस्ती पैसे वसूलने से जुड़े अनधिकृत शुल्कों से निपटने के लिए एक कानूनी कार्ययोजना मिलेगी।

बजट भाषण में व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने के मकसद से कई उपायों के बारे में बताया गया, साथ ही अनौपचारिक रुकावटों और स्थानीय वसूली को हटाने की कोशिशों के बारे में भी बताया गया, जिन्हें अक्सर व्यापारी समुदाय के कुछ हिस्से निवेश में रुकावट के तौर पर बताते हैं।

पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार ने अक्सर बड़े पैमाने पर ज़बरदस्ती वसूली के विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया था और कहा था कि कुछ घटनाओं को राजनीतिक तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है।

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