देगसर कटाणा/अमृतसर , सितंबर 02 -- मीरी-पीरी खालसा मार्च के दूसरे चरण के तहत विभिन्न स्थानों से होता हुआ मार्च बुधवार को गुरुद्वारा श्री देगसर साहिब कटाणा साहिब, लुधियाना में रात्रि विश्राम के बाद पंथक परंपराओं के साथ अगले पड़ाव गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब, चमकौर साहिब के लिए रवाना हुआ।
मार्च की शुरुआत के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी सहित प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
इस अवसर पर ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि पंथ को कमजोर करने के लिए समय-समय पर कई चुनौतियां और साजिशें सामने आती रही हैं, लेकिन यह हमेशा याद रखना चाहिए कि पंथ गुरु का है और इसे कभी कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आज एक साजिश के तहत युवाओं को नशे की ओर धकेला जा रहा है, जिसके प्रति समाज को सचेत होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नशे खुलेआम बिकने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जबकि सरकारें केवल दावों तक सीमित हैं। युवाओं को घातक नशों से बचाने के लिए सभी को सरकार के दावों पर निर्भर रहने के बजाय नशे के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को दोषी ठहराने के बजाय उन्हें नशे से बचाना और दोबारा गुरु के लड़ से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि मीरी-पीरी खालसा मार्च का उद्देश्य गुरमत प्रचार के साथ संगत को श्री अकाल तख्त साहिब के सिद्धांतों से परिचित कराना तथा युवाओं को नशों से दूर रहने और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लामबंद करना है। उन्होंने कहा कि मीरी-पीरी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि सिख जीवन का बुनियादी सिद्धांत है। गुरु साहिब ने इस सिद्धांत के माध्यम से आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने और सत्य के लिए खड़े होने का मार्ग दिखाया।एडवोकेट धामी ने कहा कि खालसा मार्च की संपूर्णता के बाद शिरोमणि कमेटी की ओर से प्रत्येक हलके में गुरमत समागम और अमृत संचार समागम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक संगत को गुरमत से जोड़ा जा सके।
मीरी-पीरी खालसा मार्च के विभिन्न पड़ावों पर संगत ने श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वागत किया। रास्ते में सजावटी गेट बनाए गए तथा विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के लंगर लगाए गए। इस दौरान ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और एडवोकेट धामी ने युवाओं को सिखी स्वरूप में लौटने तथा नशों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। कई युवाओं ने सिखी स्वरूप में रहने और नशों से दूर रहने का संकल्प भी लिया। मार्च के साथ चल रही गुरु साहिबान के ऐतिहासिक शस्त्रों वाली बस को लेकर भी संगत में खासा उत्साह देखने को मिला।
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