नयी दिल्ली , जुलाई 24 -- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) और दिल्ली मराठी प्रतिष्ठान ने शुक्रवार को पंढरपुर वारी पर एक अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित कर इस 700 वर्ष पुरानी परंपरा को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने पर जोर दिया।
आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि पंढरपुर वारी केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि भक्ति, समानता और सामुदायिक भागीदारी की सदियों पुरानी सभ्यतागत परंपरा है। उन्होंने कहा कि इसका वैश्विक सांस्कृतिक महत्व है और इसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में उचित स्थान मिलना चाहिए।
उन्होंने बताया कि बैठक का उद्देश्य दुनिया के विभिन्न देशों के राजनयिकों, विद्वानों और सांस्कृतिक विशेषज्ञों को पंढरपुर वारी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व से अवगत कराना तथा इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना था।
दिल्ली मराठी प्रतिष्ठान के अध्यक्ष वैभव डांगे ने कहा कि वारकरी परंपरा भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है और इसके संरक्षण के साथ-साथ विश्व स्तर पर इसके सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व को प्रचारित करना सभी की जिम्मेदारी है।
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