जम्मू , मई 18 -- हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा है कि महान देशभक्त पंडित प्रेम नाथ डोगरा इतिहास की उन गिने-चुने प्रभावशाली हस्तियों में से एक हैं, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय में अहम योगदान दिया था।
राज्यपाल ने यह बात यहाँ कच्ची छावनी क्षेत्र स्थित 'प्रेम नाथ डोगरा भवन' में श्री डोगरा के परिवार के सदस्यों से मुलाकात के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पंडित डोगरा ने अपने साहसी नेतृत्व, मजबूत इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के बल पर 'शेर-ए-डुग्गर' (डुग्गर का शेर) के रूप में अपनी एक खास पहचान बनाई थी। उन्होंने कहा कि पंडित डोगरा की विचारधारा और उनके बलिदान आज भी देश भर के राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की पीढ़ियों को प्रेरित कर रहे हैं।
श्री गुप्ता ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि प्रजा परिषद के अध्यक्ष के रूप में पंडित डोगरा ने एक ऐतिहासिक आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसमें उन्होंने 'एक निशान, एक विधान, एक प्रधान' का नारा बुलंद किया था और इसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी थी।
राज्यपाल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ उनके निरंतर संघर्ष ने आखिरकार जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ संवैधानिक एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि पंडित डोगरा की गिरफ्तारियों, बलिदानों और उनके अदम्य साहस ने उन्हें स्वतंत्र भारत के अग्रणी राष्ट्रवादी नेताओं की कतार में मजबूती से खड़ा कर दिया।
श्री गुप्ता ने कहा कि राजनीति से परे हटकर, पंडित डोगरा ने आम लोगों के कल्याण और डोगरी भाषा व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम किया, जिसके चलते वे हर पीढ़ी के डोगरा समाज के चहेते बन गए।
राज्यपाल ने वादा किया कि सांबा जिले में पंडित प्रेम नाथ डोगरा के पैतृक गाँव सामिलपुर में उनकी एक भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह इस महान विभूति को उसी धरती पर एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिसने उन्हें देश को समर्पित किया था।
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