लुधियाना , सितंबर 15 -- पंजाब और हरियाणा में संसाधन संरक्षण वाली कृषि पद्धतियां अपनाने वाले किसानों को जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में कार्बन क्रेडिट को खेती में उत्सर्जन घटाने और मिट्टी एवं जल संरक्षण वाली तकनीकों को अपनाने के आर्थिक प्रोत्साहन के रूप में रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में आईसीएआर के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव डॉ. एमएल जाट, आईसीएआर के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह और ग्रोइंडिगो की कार्यकारी निदेशक डॉ. उषा बरवाले जेहर मौजूद रहीं। इसमें कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कृषि संस्थानों और किसानों ने हिस्सा लिया।
डॉ. जाट ने पंजाब के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के अधिकारियों के साथ आगामी महीनों में धान की पराली जलाने की रोकथाम की कार्ययोजना पर चर्चा की। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जेपीएस गिल ने पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में धान की सीधी बुवाई (डीएसआर), कम जुताई, फसल विविधीकरण और खेत में अवशेष प्रबंधन जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने की जरूरत बतायी गयी।
ग्रोइंडिगो ने आईसीएआर के तकनीकी मार्गदर्शन में 2019 में कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तहत पंजाब और हरियाणा के 2,500 से अधिक छोटे किसानों को डीएसआर और कम जुताई वाली अवशेष प्रबंधन तकनीक अपनाने के लिए डिजिटल कार्बन क्रेडिट भुगतान मिला है। पहले चरण में करीब 30,000 एकड़ क्षेत्र से 50,000 से अधिक कार्बन क्रेडिट उत्पन्न हुए और किसानों को लगभग 3,000 से 15,000 रुपये तक का भुगतान मिला।
कार्यक्रम में बताया गया कि पंजाब में खेतों में आग लगाने की घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आयी है। वर्ष 2020 में 83,000 से अधिक घटनाओं की तुलना में 2025 में इनकी संख्या 5,000 से कम रह गयी।
इस क्षेत्र में संस्थागत सहयोग बढ़ाने के लिए आईसीएआर-एटीएआरआई, लुधियाना और ग्रोइंडिगो के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी हुआ। आयोजकों के अनुसार, यह पहल वैज्ञानिक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के लिए नयी आर्थिक संभावनाओं को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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