चंडीगढ़ , सितंबर 08 -- पंजाब सरकार ने बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ अभियान तेज करते हुए 'प्रोजेक्ट जीवनज्योत' के तहत पिछले कुछ दिनों में राज्यभर में 82 विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर 39 बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया है।
सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने मंगलवार को बताया कि जिला स्तरीय टास्क फोर्सों ने राज्य के 195 चिन्हित हॉटस्पॉट पर कार्रवाई की। बचाये गये सभी 39 बच्चों को संबंधित बाल कल्याण समितियों के समक्ष पेश किया गया, जहां उनकी देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गयी।
डॉ. कौर के अनुसार दस्तावेजों और पारिवारिक पृष्ठभूमि के सत्यापन के बाद 27 बच्चों को मौके पर ही उनके माता-पिता के सुपुर्द किया गया, जबकि 12 बच्चों को बाल देखभाल संस्थानों में रखा गया है। इन बच्चों को परिवार के हवाले करने से पहले अभिभावकों और रिश्ते का उचित सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का जोर केवल बच्चों को सड़कों से हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा और सुरक्षित पारिवारिक वातावरण से जोड़ना भी अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। छह बच्चों के स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है, जबकि छह अन्य बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान सबसे अधिक 10 बच्चे तरनतारन से बचाये गये, जबकि अमृतसर से नौ, लुधियाना से सात और एसएएस नगर से पांच बच्चों को रेस्क्यू किया गया।
डॉ. कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार का मानना है कि हर विद्यार्थी का स्थान सड़क पर नहीं बल्कि स्कूल और सुरक्षित पारिवारिक माहौल में है। सरकार बाल भिक्षावृत्ति को समाप्त करने के लिए रेस्क्यू, पुनर्वास और शिक्षा संबंधी प्रयासों को लगातार मजबूत करेगी।उन्होंने लोगों से अपील की कि भिक्षावृत्ति करते किसी बच्चे या देखभाल एवं संरक्षण की जरूरत वाले बच्चे की जानकारी तत्काल जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर दें। उन्होंने कहा कि समय पर किया गया हस्तक्षेप किसी बच्चे को शोषण से बचाकर उसे बेहतर भविष्य की ओर ले जा सकता है।
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