चंडीगढ़ , सितंबर 03 -- पंजाब सरकार ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ अपने अभियान को तेज करते हुए समय पर हस्तक्षेप और विभिन्न विभागों के समन्वय से पांच बाल विवाह रुकवाये हैं। सरकार के अनुसार, इन कार्रवाइयों से संबंधित बच्चों के भविष्य और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हुई है।

सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने गुरुवार को कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के शिक्षा, विकास और अपने सपनों को पूरा करने के अधिकार को प्रभावित करता है तथा सरकार इस गैरकानूनी प्रथा को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने बताया कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए राज्यभर में अब तक 172 जागरूकता अभियान आयोजित किये जा चुके हैं। इन अभियानों के माध्यम से अभिभावकों, पंचायतों, स्कूलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों को बाल विवाह के सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों तथा इससे संबंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के मामले में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, बाल कल्याण समितियों, बाल विवाह निषेध अधिकारियों और संबंधित विभागों के बीच समन्वय को मजबूतकिया गया है।

डॉ. कौर ने लोगों से अपील की कि वे बाल विवाह की किसी भी आशंका की सूचना तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या निकटतम बाल विवाह निषेध अधिकारी को दें। उन्होंने कहा कि समय पर मिली सूचना किसी बच्चे को गैरकानूनी विवाह से बचाने और उसका भविष्य सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

डॉ कौर के अनुसार, राज्यभर में 2,076 अधिकारियों को बाल विवाह निषेध अधिकारी नियुक्तकिया गया है। इनमें सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य और बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) शामिल हैं, जो जमीनी स्तर पर बाल विवाह की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार समुदायों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों और प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से पंजाब को बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने के लिए प्रयास जारी रखेगी।

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