चंडीगढ़ , अक्टूबर 21 -- पंजाब में पराली प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए किसानों ने इस सीजन में फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) की 21,019 मशीनें खरीदी हैं। इनमें सुपर सीडर किसानों की पहली पसंद बनकर उभरी है।
राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बुधवार को जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार की सब्सिडी योजना और जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप पराली जलाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
श्री खुड्डियां ने बताया कि किसानों ने सबसे अधिक 14,274 सुपर सीडर मशीनें खरीदी हैं। इसके बाद 1,721 मल्चर और 1,346 हाइड्रोलिक रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ की खरीद हुई। इसी तरह 1,123 जीरो टिल ड्रिल और 927 बेलिंग मशीनें खरीदी गईं। इसके अलावा 874 स्ट्रॉ रेक और अन्य कृषि उपकरणों की भी खरीद की गई है।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार व्यक्तिगत किसानों को सीआरएम मशीनों की खरीद पर 50 प्रतिशत, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटरों (सीएचसी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों और पंचायतों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। उन्होंने कहा कि इस आर्थिक सहायता से किसानों को पराली जलाने के बजाय फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रोत्साहन मिला है।उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए 576 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। उनके अनुसार, सरकार के प्रयासों से पराली जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022 में राज्य में पराली जलाने के 49,922 मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2025 में इनकी संख्या घटकर 5,114 रह गई।
श्री खुड्डियां ने कहा कि सब्सिडी और जागरूकता अभियानों से किसानों की सोच में बदलाव आया है और वे फसल अवशेषों को समस्या के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में देखने लगे हैं।उन्होंने बताया कि सुपर सीडर और जीरो टिल ड्रिल जैसी मशीनों की मदद से पराली को खेत में रखते हुए गेहूं की सीधी बिजाई की जा सकती है। इससे समय की बचत होती है और मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। वहीं, बेलर और रेक जैसी मशीनों से पराली को खेत से बाहर निकालकर बिजली उत्पादन तथा पशुओं के चारे जैसे कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
कृषि मंत्री ने किसानों से फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का अधिकाधिक उपयोग करने और पराली जलाने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना सामूहिक जिम्मेदारी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने में प्रत्येक किसान की भूमिका महत्वपूर्ण है।
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