चंडीगढ़ , मई 14 -- पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पंजाब में विधानसभा चुनाव से करीब 10 महीने पहले मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया शुरू किए जाने के समय पर सवाल उठाये हैं और कहा कि राज्य चुनाव की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में इस प्रक्रिया की जल्दबाजी पर संदेह पैदा होता है।

राजा वड़िंग ने गुरुवार को भारतीय निर्वाचन आयोग की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पंजाब में यह प्रक्रिया चुनाव के बाद भी कराई जा सकती थी, ताकि लोगों को यह भरोसा रहता कि इसके पीछे कोई छिपा एजेंडा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों ने यह साबित किया है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार और चुनाव आयोग की मदद से एसआईआर जैसी प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने पूछा कि जब पंजाब में चुनाव 10 महीने से भी कम समय में होने हैं, तो इस प्रक्रिया की इतनी क्या जल्दबाजी है?राजा वड़िंग ने सवाल किया कि पंजाब में एसआईआर प्रक्रिया उत्तर प्रदेश और गोवा के साथ छह महीने पहले क्यों नहीं कराई गयी, जबकि इन राज्यों में भी चुनाव पंजाब के साथ ही होने हैं। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में 27 लाख वास्तविक मतदाता वोटर सूची से बाहर हो गये थे। उन्होंने कहा कि समय कम होने के कारण उनकी अपीलों का निपटारा चुनाव से पहले नहीं हो सका और वे मतदान के अधिकार से वंचित रह गये।

राजा वड़िंग ने कहा कि उनकी पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिये हैं कि कोई भी वास्तविक मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस कथित साजिश को नाकाम करेगी। उन्होंने राज्य की अन्य राजनीतिक पार्टियों से भी अपील की कि वे अपने राजनीतिक मतभेद भुलाकर पंजाबी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने कहा कि पंजाब में बिहार और बंगाल जैसी स्थिति नहीं बनने दी जाएगी।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित