चंडीगढ़ , अक्टूबर 13 -- ऑल पंजाब क्रशर एसोसिएशन ने राज्य में स्टोन क्रशर उद्योग को पेश आ रही परिचालन संबंधी समस्याओं, विभागीय प्रक्रियाओं की अड़चनों, पोर्टल की तकनीकी खामियों और विभिन्न शुल्कों के बढ़ते बोझ पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो उद्योग से जुड़े लोग प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने और क्रशर इकाइयां बंद करने के लिए मजबूर होंगे।
एसोसिएशन के अध्यक्ष मेजर बीडी गुप्ता, अध्यक्ष मनप्रीत सिंह गिल और अन्य प्रतिनिधियों ने मंगलवार को यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि क्रशर उद्योग सड़कों, पुलों, राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य निर्माण परियोजनाओं के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराता है। राज्य के विकास में योगदान के बावजूद उद्योग की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
श्री गिल ने कहा कि वर्ष 2015 में क्रशर इकाइयों को उद्योग विभाग से हटाकर खान एवं भूविज्ञान विभाग के अधीन लाए जाने के बाद से उद्योग को नीतिगत अस्थिरता और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्रशर इकाइयां खनन नहीं करतीं, बल्कि खदानों से कच्चा माल खरीदकर उसका प्रसंस्करण करती हैं। इसके बावजूद उन्हें ऐसी प्रक्रियाओं और नियमों का सामना करना पड़ रहा है, जिनसे कारोबार प्रभावित हो रहा है।
एसोसिएशन ने बिजली की बार-बार कटौती और विभागीय पोर्टल की तकनीकी खामियों को प्रमुख समस्याएं बताते हुए कहा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने से सामग्री की ढुलाई और लोडिंग में देरी होती है। वहीं, पोर्टल पर जरूरी क्यू-बिल नहीं बन पाने के कारण सामग्री से लदे वाहन क्रशर परिसरों में फंस जाते हैं। एसोसिएशन ने अधिक क्षमता वाले जनरेटर सेट इस्तेमाल करने की अनुमति देने और पोर्टल की कार्यप्रणाली दुरुस्त करने की मांग की।
प्रतिनिधियों ने स्टॉक रिटर्न की प्रक्रिया समय पर पूरी करने, एक्सपेंशन फैक्टर से जुड़े लंबित मामलों का निपटारा करने तथा पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया निरंतर जारी रखने की मांग भी की। उनका कहना था कि पोर्टल पर दर्ज विसंगतियों को समय रहते दूर नहीं किया जाता, जबकि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बावजूद उद्योग संचालकों को नोटिस जारीहो जाते हैं।
वित्तीय बोझ का मुद्दा उठाते हुए एसोसिएशन ने मांग की कि मिनरल प्रोसेसिंग फीस (एमपीएफ) कानून के प्रावधानों के अनुसार प्रसंस्कृत सामग्री पर लगाई जाए, न कि बिक्री के बिलों के आधार पर। उसने शुल्क लागू होने से पहले उपलब्ध स्टॉक पर वसूली गई अतिरिक्त राशि लौटाने की भी मांग की। प्रतिनिधियों के अनुसार, एमपीएफ, पर्यावरण प्रबंधन कोष (ईएमएफ), पंजीकरण शुल्क, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और बिजली खर्च का संयुक्त बोझ उद्योग के लिए चुनौती बन रहा है। एसोसिएशन ने अंतरराज्यीय चेक पोस्टों पर पर्याप्त निगरानी नहीं होने से सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान का मुद्दा उठाते हुए अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की। प्रतिनिधियों ने कहा कि खान एवं भूविज्ञान विभाग को खदानों, खनन स्थलों और नदी तल में अवैध खनन रोकने पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, अवैध खनन के स्रोत पर कार्रवाई करने के बजाय क्रशर इकाइयों की निगरानी तक सीमित रहने से समस्या का प्रभावी समाधान नहीं होगा।
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