चंडीगढ़ , मई 18 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष एवं नेशनल शेड्यूल्ड कास्ट्स अलायंस के अध्यक्ष परमजीत सिंह कैथ ने पंजाब पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पत्र लिखा है।

श्री कैंथ ने सोमवार को कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणियों और निर्देशों के बाद पंजाब विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज की गयी एफआईआर ने छात्रवृत्ति योजना में गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि यह घोटाला केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, संवैधानिक समानता और दलित छात्रों के शैक्षणिक अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2016-17 से छात्रवृत्ति फंड में गड़बड़ियों, फर्जी ऑडिट रिपोर्ट, डबल भुगतान, सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी और अनुसूचित जाति छात्रों के लिए आवंटित करोड़ों रुपये के दुरुपयोग के मामले सामने आये हैं।

श्री कैंथ ने कहा कि इतने वर्षों तक मामला सामने होने के बावजूद करीब पांच साल तक एफआईआर दर्ज नहीं किया जाना बेहद गंभीर लापरवाही है, जिस पर उच्च न्यायालय ने भी पंजाब सरकार को फटकार लगायी थी। उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट किया था कि संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के 'ललिता कुमारी' फैसले के अनुसार तुरंत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति वितरण में देरी और अनियमितताओं के कारण हजारों पात्र दलित छात्रों को मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह मामला पंजाब के लाखों अनुसूचित जाति छात्रों के भविष्य और उच्च शिक्षा से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से मांग की कि वह इस मामले का तुरंत संज्ञान ले, पंजाब सरकार और जांच एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करे तथा जांच की निष्पक्ष और समयबद्ध निगरानी सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि इस घोटाले में शामिल अधिकारियों, शैक्षणिक संस्थानों, बिचौलियों और राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

श्री कैंथ ने यह भी मांग की कि भविष्य में छात्रवृत्ति राशि सीधे पात्र अनुसूचित जाति छात्रों के खातों में पहुंचाने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि हर दलित छात्र तक सम्मान, अवसर और अधिकार पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचने चाहिए। उनके अनुसार पारदर्शिता, जवाबदेही और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर व्यवस्था ही सामाजिक न्याय का सही रास्ता है।

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