अमृतसर , जुलाई 26 -- पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कथित पेपर लीक, हाई-टेक नकल और भर्ती घोटालों का आरोप राज्य सरकार पर लगाते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री और मेडिकल शिक्षा मंत्री से नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है।

भाजपा पंजाब के प्रवक्ता प्रो. सरचांद सिंह ख्याला ने रविवार को कहा कि राज्य में कथित पेपर लीक की घटनाओं ने आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार की "ईमानदारी" के दावों की पोल खोल दी है। प्रो. ख्याला ने कहा कि जुलाई 2026 में फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा के दौरान पेन कैमरों और वायरलेस उपकरणों के जरिए हाई-टेक नकल गिरोह का भंडाफोड़ कोई अकेली घटना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मई 2022 में पीपीएससी नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, फरवरी 2023 में पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा के अंग्रेजी पेपर लीक, मार्च 2023 में पीएसटीईटी परीक्षा में प्रश्नपत्रों में उत्तर छपने, जून 2024 में कृषि विकास अधिकारी (एडीओ) भर्ती परीक्षा और दिसंबर 2025 में पीएसएसएसबी ग्रुप-बी भर्ती परीक्षा से जुड़े विवादों ने भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार की परीक्षाओं को लेकर विवाद होता था, तब आम आदमी पार्टी और श्री केजरीवाल केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते थे और नैतिकता की बात करते थे। लेकिन पंजाब में लगातार सामने आ रहे मामलों पर न तो कोई विरोध प्रदर्शन हो रहा है और न ही किसी मंत्री की जवाबदेही तय की जा रही है।

प्रो. ख्याला ने कहा कि दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कभी कहा था कि यदि पंजाब में पेपर लीक होगा तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री को हटाया जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या वह बयान केवल राजनीतिक लाभ के लिए दिया गया था या उस पर अमल भी होगा।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राज्य के लोग यह जानना चाहते हैं कि इतने गंभीर मामलों के बावजूद शिक्षा मंत्री और मेडिकल शिक्षा मंत्री अभी तक अपने पदों पर क्यों बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी विपक्ष में रहते हुए जिन नैतिक मानकों की बात करती थी, सत्ता में आने के बाद उन्हीं मानकों को भूल गई है।

प्रो. ख्याला ने कहा कि पंजाब के लाखों युवा अब भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा खोते जा रहे हैं और हर नया पेपर लीक सरकार की प्रशासनिक विफलता का प्रमाण बनता जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार जांच और सफाई देने के बजाय जवाबदेही तय करे तथा अपने ही घोषित नैतिक मानकों के अनुरूप शिक्षा मंत्री और मेडिकल शिक्षा मंत्री से तत्काल इस्तीफा लेकर यह साबित करे कि कानून और नैतिकता सभी के लिए समान हैं।

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