चंडीगढ़ , अप्रैल 27 -- गर्मी बढ़ने के कारण बिजली की मांग में तेज और अचानक वृद्धि को देखते हुए भगवंत मान सरकार ने पूरे पंजाब में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाए हैं। बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने कहा कि भले ही पंजाब में बिजली की मांग दस दिनों के भीतर 7,900 मेगावाट से बढ़कर 12,000 मेगावाट से अधिक हो गई है, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि राज्य में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

मिशन रोशन के तहत 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बिजली ढांचे के सुधार परियोजनाओं और गैर-योजनाबद्ध आउटेज में लगभग 70 प्रतिशत की कमी के साथ पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) ग्रिड स्थिरता बनाए रखने में सफल रहा है, वह भी ऐसे समय में जब देश के कई हिस्से बिजली की कमी से जूझ रहे हैं। इससे पंजाब गर्मियों में बिजली की चरम मांग के प्रबंधन में अग्रणी राज्यों की कतार में शामिल हो गया है।

आज यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पंजाब के बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा ने जोर देकर कहा कि भगवंत मान सरकार ने वर्तमान गर्मी के मौसम के दौरान बिजली की मांग में अचानक वृद्धि से निपटने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं और भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य भर में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि पीएसपीसीएल वर्तमान गर्मी के मौसम के दौरान बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और पूरे राज्य में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बिजली मंत्री ने मांग में हाल ही में हुई वृद्धि पर बात करते हुए कहा कि अचानक गर्मी बढ़ने के कारण पिछले कुछ दिनों में पंजाब में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। उल्लेखनीय है कि राज्य में बिजली की मांग 15 अप्रैल को लगभग 7,900 मेगावाट से बढ़कर 25 अप्रैल तक 12,000 मेगावाट से अधिक हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है।

पंजाब की तैयारियों पर जोर देते हुए उन्होंने आगे कहा कि इस अचानक वृद्धि के बावजूद पीएसपीसीएल ने समय पर योजना, मजबूत बुनियादी ढांचे और अग्रिम बिजली प्रबंधन के माध्यम से मांग को सफलतापूर्वक संभालते हुए ग्रिड स्थिरता बनाए रखी है।

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने देशभर की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है और देश ने 24 अप्रैल को 252 गीगावाट की सर्वाधिक मांग दर्ज की, जबकि उपलब्ध आपूर्ति लगभग 239 गीगावाट थी, जिससे 13 गीगावाट की कमी उत्पन्न हुई। कई राज्य बिजली की कमी और कटौती का सामना कर रहे हैं, लेकिन सक्रिय योजना के कारण पंजाब की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है।

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