चंडीगढ़ , सितंबर 21 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाया जा रहा 'युद्ध नशों विरुद्ध' अभियान केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की आपूर्ति रोकने, रोकथाम, जनभागीदारी और उपचार को शामिल करते हुए पांच स्तरों पर काम कर रहा है। सरकार के प्रवक्ता ने सोमवार को यहां जारी बयान में कहा कि मार्च 2025 से सितंबर 2026 के बीच एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 61,824 प्राथमिकी दर्ज कर 81,433 लोगों को गिरफ्तार किया। इस दौरान 3,918 किलोग्राम हेरोइन, 991 किलोग्राम अफीम, 47 टन पोस्त की भूसी, 1,416 किलोग्राम गांजा तथा 65 लाख टैबलेट और कैप्सूल बरामद किये गये।
अभियान के तहत 3,600 स्कूलों के 7.5 लाख विद्यार्थियों को 14 सप्ताह का नशा विरोधी पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। सरकार ने बताया कि करीब 25,000 शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित करने की योजना है, जबकि अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का में 7,000 शिक्षक संवेदनशील बनाए जा चुके हैं।
सरकार के मुताबिक करीब 15,000 गांव एवं वार्ड रक्षा समितियों से 1.25 लाख सदस्य जुड़े हैं। इनमें 50,000 से अधिक सदस्यों को 'नशा मुक्ति ऐप' के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, मार्च 2025 से नागरिकों की ओर से 'सेफ पंजाब' व्हाट्सऐप हेल्पलाइन पर 51,000 से अधिक सूचनाएं मिलीं, जिनके आधार पर 25,000 से अधिक नशा संबंधी गिरफ्तारियां की गयीं।
उपचार के मोर्चे पर राज्य में 547 ओओएटी केंद्र, 219 नशामुक्ति केंद्र और 91 पुनर्वास केंद्र संचालित होने की जानकारी दी गई है। सरकार के अनुसार सरकारी नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में दाखिले 2024 में 12,200 से बढ़कर 2025 में करीब 34,000 हो गए, जो 170 प्रतिशत से अधिक वृद्धि है।
सरकार ने कहा कि अभियान का उद्देश्य नशे की आपूर्ति पर कार्रवाई के साथ युवाओं में रोकथाम, समुदाय की निगरानी और नशे से जूझ रहे लोगों को उपचार एवं पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराना है।
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