फगवाड़ा , जुलाई 16 -- पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने गुरुवार को लोगों से जल संसाधनों को प्रदूषण से बचाने के लिए एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि पर्यावरण का लगातार हो रहा नुकसान मानव अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।

पवित्र काली बेईं की कार सेवा की 26वीं वर्षगांठ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए श्री संधवां ने कहा कि स्वच्छ जल जीवन का आधार है। भूजल स्तर में लगातार गिरावट और जल स्रोतों के बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए पूरे समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के नेतृत्व में स्वयंसेवकों द्वारा पवित्र काली बेईं के पुनर्जीवन को जनभागीदारी का ऐतिहासिक उदाहरण बताया और विश्वास जताया कि बुद्धा दरिया का भी जल्द ही इसी मॉडल पर कायाकल्प होगा।

श्री संधवां ने उद्योगों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक को अनिवार्य रूप से लागू करने की वकालत करते हुए कहा कि बिना शोधन के जहरीले अपशिष्ट जल स्रोतों में छोड़ने वाले मानवता के दुश्मन हैं।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने गुरबाणी की पंक्ति 'पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत' का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब ने सिंचाई के लिए उपलब्ध नहरी पानी का 80 प्रतिशत उपयोग कर भूजल पर निर्भरता को काफी कम किया है। उन्होंने सीचेवाल तालाब मॉडल को प्राकृतिक तरीके से गंदे पानी के शोधन का सफल उदाहरण बताया।

जेल एवं एनआरआई मामलों के मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा कि संत सीचेवाल के अथक प्रयासों और जनसहयोग से कभी अत्यधिक प्रदूषित रही काली बेईं आज स्वच्छ जलधारा में बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और बुद्धा दरिया भी जल्द प्रदूषण मुक्त होगा।

राज्यसभा सीचेवाल ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि काली बेईं का पुनर्जीवन सामूहिक प्रयास, निस्वार्थ सेवा और ईश्वर की कृपा से संभव हुआ है। उन्होंने लोगों से नदियों, तालाबों, भूजल, जंगलों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील की तथा उद्योगों और संस्थानों से पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणाली अपनाने का आग्रह किया।

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