अमृतसर , अक्टूबर 21 -- पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या, दूसरे राज्यों से हो रहे पलायन और प्रदेश से जुड़े अन्य गंभीर मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए दल खालसा एक नवंबर को चंडीगढ़ के किसान भवन में सम्मेलन आयोजित करेगा।

पंजाब दिवस के अवसर पर होने वाले इस सम्मेलन में राज्य के भविष्य और इन चुनौतियों से निपटने के लिए संघर्ष की आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी। संगठन ने कहा कि विचार-विमर्श के बाद संघर्ष की भावी दिशा की घोषणा की जाएगी। दल खालसा के कार्यकारी अध्यक्ष परमजीत सिंह मंड, सचिव परमजीत सिंह टांडा और रणवीर सिंह ने बुधवार को अमृतसर स्थित पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह जानकारी दी।

उन्होंने नशों के खिलाफ अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने पंजाब की मौजूदा स्थिति और उसके भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंड ने आरोप लगाया कि चुनावी माहौल में विभिन्न राजनीतिक दल झोटा के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन कोई भी नशे के कारोबार को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने और इसके पीछे सक्रिय प्रभावशाली लोगों की जवाबदेही तय करने के लिए तैयार नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है।

दल खालसा नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे को चुनावी मकसद से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चार साल पहले भी श्री शाह ने गायक सिद्धू मूसेवाला के घर जाकर इसी तरह के आश्वासन दिए थे। मंड ने केंद्र सरकार पर गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया।

मंड ने कहा कि नशीले पदार्थों का बढ़ता प्रसार, तंबाकू का बढ़ता सेवन, दूसरे राज्यों से बेरोकटोक पलायन, पंजाब के नदी जल के कथित भेदभावपूर्ण वितरण, सिख कार्यकर्ताओं की लंबे समय से जारी कैद और श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्रता एवं सम्मान से जुड़े मुद्दे प्रदेश के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने पुलिस द्वारा गिरफ्तारियों, कथित यातना और गैरकानूनी हत्याओं की घटनाओं पर भी चिंता जताई।

प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे पर मंड ने कहा कि पंजाब की कृषि और औद्योगिक गतिविधियों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके स्थायी रूप से बसने, मतदाता सूचियों की संरचना में बदलाव और पंजाब की भाषाई एवं सांस्कृतिक पहचान पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों से जुड़े सवालों पर भी चर्चा होनी चाहिए। संगठन के अनुसार, एक नवंबर को होने वाले सम्मेलन में समान विचारधारा वाले संगठनों, जमीनी स्तर पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, विशेषज्ञों और विभिन्न आंदोलनों से जुड़े लोगों को भी आमंत्रित किया जाएगा। सम्मेलन में पंजाब के सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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