चंडीगढ़ , अप्रैल 2 -- पंजाब में गेहूं की खरीद प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आम आदमी पार्टी (आप) ने किसानों को मंडियों में बेहतरीन सुविधाएं और हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।

पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पिछले चार वर्षों में कृषि क्षेत्र में किए गए क्रांतिकारी सुधारों और चालू खरीद सीजन की तैयारियों पर प्रकाश डाला।

किसान विंग के चेयरमैन महिंदर सिंह सिद्धू ने गुरूवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि मान सरकार ने किसानों के लिए जो कदम उठाए हैं, वे अभूतपूर्व हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी भेदभाव के किसान परिवारों को 600 यूनिट मुफ्त बिजली दी जा रही है। पहली बार किसानों को खेती के लिए रात के बजाय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक निर्बाध बिजली मिल रही है। गांवों के स्कूलों में सुधार से किसानों और मजदूरों के बच्चे अब उच्च पदों पर पहुंच रहे हैं।

श्री सिद्धू ने बताया कि पंजाब के 1,896 अनाज मंडियों और खरीद केंद्रों पर किसान विंग को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। विंग के पदाधिकारी सरकारी अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे ताकि फसल की तुलाई सही समय पर हो।

किसानों को तुरंत जे-फॉर्म जारी किए जाएं। मंडियों में पानी, बिजली और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम रहें।

किसान विंग के महासचिव सतबीर सिंह बख्शी वाला ने पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि पहले किसानों को मंडियों में 3-4 रातें बितानी पड़ती थीं, लेकिन अब उठान की प्रक्रिया इतनी तेज है कि किसानों को एक रात भी रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि फसल की लिफ्टिंग में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आप के राज्य मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने बताया कि खेतों के बीचों-बीच स्थित बिजली के खंभों की समस्या को हल करने के लिए एक नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री के पैतृक गांव सतोज से होगी और बाद में इसे पूरे पंजाब में लागू किया जाएगा। खराब मौसम के कारण आवक में थोड़ी देरी हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में खरीद तेजी पकड़ेगी।

पन्नू ने कृषि सिंचाई पर जोर देते हुए कहा कि जब मान सरकार सत्ता में आई थी, तब केवल 22 प्रतिशत खेतों तक नहरी पानी पहुंचता था, जिसे अब बढ़ाकर 88 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का अगला लक्ष्य इसे 90 प्रतिशत से पार ले जाना है। इससे न केवल फसल की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि गिरते भूजल स्तर को बचाने में भी मदद मिलेगी।

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