पटना , अप्रैल 30 -- बिहार पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत सरकार भवनों के निर्माण में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।
विभाग ने कहा है कि जहां भी शिकायत प्राप्त हो रही है, वहां तत्काल जांच करायी जा रही है।
समाचार पत्र में प्रकाशित "पंचायत भवनों के निर्माण में भारी गड़बड़ी उजागर, घटिया सामग्री का हो रहा प्रयोग" शीर्षक समाचार का संज्ञान लेते हुए पंचायती राज विभाग ने कहा कि राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत सरकार भवनों का निर्माण चल रहा है। पंचायत सरकार भवन के निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये विभाग प्रतिबद्ध है। निर्माण कार्यों की पारदर्शिता को लेकर विभाग पूर्णतः सजग एवं संवेदनशील है।
विभाग के निदेशक ने स्पष्ट किया कि विभाग के समक्ष इस तरह निर्माण से संबंधित शिकायतें आती हैं तो विभाग की ओर से तत्काल जांच शुरू कर दी जाती है। संबंधित मामलों की तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर जांच करायी जाती है। प्रारंभिक जांच में जिन स्थानों पर निर्माण मानकों अथवा स्वीकृत डिजाइन से विचलन की शिकायत प्राप्त हुई है, वहां विस्तृत सत्यापन के लिये सक्षम अधिकारियों की टीम गठित कर जांच कराई जा रही है। आवश्यक कार्रवाई के लिये जांच प्रतिवेदन निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों को भी विभाग द्वारा नियमित रूप से भेजा जा रहा है।
विभाग ने कहा कि पंचायत सरकार भवनों का निर्माण स्वीकृत तकनीकी मानकों एवं विभागीय प्राक्कलन के अनुरूप कराया जाना अनिवार्य है। किसी भी स्तर पर घटिया सामग्री, डिजाइन विचलन अथवा वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
विभाग यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत सरकार भवन योजना राज्य सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी पहल है, जिसके माध्यम से ग्राम पंचायतों में "मिनी सचिवालय" की अवधारणा को मूर्त रूप दिया जा रहा है। अब तक राज्य में हजारों पंचायत सरकार भवनों का निर्माण पूरा किया जा चुका है और कई भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। जिनसे ग्रामीण जनता को पंचायत स्तर पर विभिन्न सरकारी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। विभाग प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शी जांच एवं जवाबदेह कार्रवाई की नीति पर कार्य कर रहा है।
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