नयी दिल्ली , मार्च 11 -- पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने देश में महिला पंचों-सरपंचों के नाम पर उनके रिश्तेदारों द्वारा शासन चलाने को निराधार बताते हुए राज्यसभा में बुधवार को कहा कि 'पंचायत-पति, सरपंच-पति' जैसी कोई व्यवस्था नहीं चल रही है और वास्तविक शासन निर्वाचित प्रतिनिधि ही चलाते हैं।
आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि महिला आरक्षण के उद्देश्य को विफल करते हुए आम तौर पर किसी नेता की पत्नी, बहन, बेटी या बहू ही पंचायतों में जीतती हैं और वास्तव में शासन उनके पति या अन्य रिश्तेदार ही चलाते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इस बात को स्वीकार करती है कि इस तरह की एक समानांतर व्यवस्था स्थापित हो गयी है जिसमें वास्तविक शासन पंचायत-पति के माध्यम से होता है।
श्री सिंह ने ऐसे समानांतरों पदों के अस्तित्व को खारिज करते हुए कहा कि सदस्य अनावश्यक बात को यहां शामिल कर रहे हैं । मोदी सरकार महिला सशक्तिकरण पर जोर देती है। उन्होंने कहा कि चुनाव में उतरने वाली महिलाएं कौन होंगी, कैसे होंगी यह पंजाब में ये (आम आदमी पार्टी के नेता) तय कर सकते हैं, हम लोग देश में यह काम नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं का सशक्त करने का काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी।
पंचायती राज राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि पंचायतों को अब पहले से ज्यादा स्वायत्तता दी जा रही है। उन्हें 13वें वित्त आयोग में 65 हजार करोड़ रुपये का फंड दिया गया था जो बढ़ते हुए 16वें वित्त आयोग में 4.35 लाख करोड़ हो गयी है। उन्होंने बताया कि साल 2014 से पहले एक व्यक्ति के हिस्से में औसतन 178 रुपये आते थे। चौदहवें वित्त आयोग के समय यह राशि बढ़कर 480 रुपये और 15वें वित्त आयोग के समय 674 करोड़ रुपये हो गयी। उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग के समय 1,270 रुपये प्रति व्यक्ति मिलेगा।
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