अलवर , अक्टूबर 29 -- राजस्थान में जारी पंचायत चुनावों का असर अब शहरों के कामकाज पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अलवर शहर में पिछले करीब 15 दिनों से मजदूरों की कमी बनी हुई है। निर्माण कार्यों से लेकर अन्य दैनिक कामकाज तक प्रभावित हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि मकान बनवाने वाले लोगों, ठेकेदारों और निर्माण कार्यों से जुड़े कारोबारियों को जरूरत के मुताबिक मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। चुनावी माहौल के बीच ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में काम करने आने वाले श्रमिकों की आवाजाही कम होने से शहर में मजदूरों का संकट गहराता जा रहा है।

पंचायत चुनावों के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने गांवों में ही रुके हुए हैं। कई लोग खुद चुनाव मैदान मेंहैं, तो कई के परिवार के सदस्य, रिश्तेदार या सगे-संबंधी चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में उनके समर्थन में प्रचार करने, चुनावी गतिविधियों में शामिल होने और अपने प्रत्याशियों की मदद करने के लिए लोग गांवों में जुटे हुए हैं।

इसका सीधा असर उन मजदूरों की उपलब्धता पर पड़ रहा है, जो सामान्य दिनों में काम की तलाश में अलवर शहर आते हैं। मजदूरों की कमी के कारण निर्माण स्थलों पर काम की गति धीमी हो गई है और कई जगह काम निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।

पंचायत चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 31 अक्टूबर को संपन्न होना है। इसके बाद भी मजदूरों की समस्या तुरंत समाप्त होने की संभावना कम है। चुनाव प्रक्रिया के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य गतिविधियों और चुनाव परिणामों को लेकर भी लोगों की व्यस्तता बनी रह सकती है। जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के परिणाम दिवाली के बाद आने हैं। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े लोगों की आवाजाही और व्यस्तता का असर कुछ समय तक जारी रहने की संभावना है।

शहर में मजदूरों की कमी से मकान निर्माण, मरम्मत, प्लास्टर, चिनाई और अन्य निर्माण संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जिन लोगों ने दिवाली से पहले अपने निर्माण कार्य पूरे करने की योजना बनाई थी, उनके सामने अब काम समय पर पूरा कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। मजदूरों के नहीं मिलने से ठेकेदारों के सामने भी काम को तय समय में पूरा करने का दबाव है। वहीं, निर्माण कार्यों में देरी से लोगों की योजनाएं आगे खिसक रही हैं।

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