बारां , अक्टूबर 25 -- राजस्थान में बारां में साहित्य, संस्कृति और भारतीय काव्य परंपरा को समर्पित पंचम गुरुकुल महोत्सव-2026 का दो दिवसीय आयोजन उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

24 और 25 अक्टूबर को आयोजित महोत्सव में देशभर से 50 से अधिक कवि- साहित्यकारों ने शिरकत की। इस दौरान छह स्थानों पर एक साथ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, छंद लेखन पर विशेष प्रशिक्षण, चार पुस्तकों का विमोचन और गुरुकुल सम्मान समारोह सहित विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

महोत्सव के तहत 24 अक्टूबर को शाम सात से 10 बजे तक बारां और आसपास के क्षेत्रों में छह स्थानों पर एक साथ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किए गए। अलग-अलग स्थानों पर आयोजित काव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से साहित्य और कविता का संदेश व्यापक स्तर पर आमजन तक पहुंचा।

महोत्सव में छंद लेखन और भारतीय काव्य परंपरा पर केंद्रित विशेष प्रशिक्षण सत्र आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। गुरु सक्सेना ने छंदों की महत्ता बताते हुए कहा, "कविता का अनुशासन ही छंद है। छंद में कही गई बात का प्रभाव अधिक होता है।"उन्होंने कहा कि गुरुकुल के माध्यम से रचनाकार विभिन्न छंदों का अध्ययन और अभ्यास कर रहे हैं। इसका उद्देश्य भारतीय पिंगल शास्त्र की समृद्ध परंपरा को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। छंद कविता को लय, अनुशासन और प्रभाव प्रदान करता है। इसके नियमित अभ्यास से रचनाकार अपनी अभिव्यक्ति को अधिक सशक्त बना सकते हैं।

प्रशिक्षण सत्र में मात्रा-विधान, लय, छंदों की रचना-प्रक्रिया और उनकी बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि अच्छी रचना के लिए लिखने के साथ पढ़ना, सुनना, समझना और निरंतर अभ्यास करना भी आवश्यक है।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रद्युम्न वर्मा ने छंद परंपरा पर विचार व्यक्त करते हुए छंदों के विरुद्ध होने वाले हमलों को 'साहित्यिक आतंकवाद' की संज्ञा दी। सत्र में तुक, लय, पारंपरिक छंद और अतुकांत कविता जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। हिंदी के विद्वान डॉ. विवेक सक्सेना, नृसिंहपुर (मध्यप्रदेश) ने सत्र का संचालन किया।

महोत्सव के दौरान साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़ी चार पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें डॉ. सुरेंद्र यादवेंद्र की पुस्तक 'दौपद्री', गोविंद यादव का कहानी संग्रह, आशा रानी की 'ची ची चूं चूं' और गुरु सक्सेना की 'सूरपंखा' शामिल रहीं।

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