कानपुर , मई 20 -- उत्तर प्रदेश के श्रम आयुक्त मार्केण्डेय शाही ने बुधवार को कहा कि न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और पे स्लिप में लापरवाही बरतने वाले उद्यमियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। उन्होने कहा कि श्रमिक असंतोष के प्रमुख कारणों में निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान न होना, ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाना, साप्ताहिक अवकाश में कटौती तथा वेतन पर्ची उपलब्ध न कराना शामिल हैं। श्री शाही ने कानपुर नगर और कानपुर देहात की फैक्ट्रियों में हाल के दिनों में सामने आए श्रमिक असंतोष और धरना-प्रदर्शन की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए बुधवार को समीक्षा बैठक बुलायी। बैठक में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल, दोनों जिलों के उद्योगपति तथा श्रमिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उन्होने कहा कि श्रमिक असंतोष के प्रमुख कारणों में निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान न होना, ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाना, साप्ताहिक अवकाश में कटौती तथा वेतन पर्ची उपलब्ध न कराना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नोएडा प्रकरण के बाद शासन द्वारा 17 अप्रैल को जारी शासनादेश के तहत निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान अनिवार्य किया गया है, लेकिन कई स्थानों पर विशेष रूप से संविदाकारों द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक श्रमिक को, चाहे वह सेवायोजक के मस्टर रोल पर कार्यरत हो, संविदाकार के अधीन हो अथवा किसी अन्य व्यवस्था में काम कर रहा हो, निर्धारित न्यूनतम वेतन दिया जाना अनिवार्य है।
श्रम आयुक्त ने कहा कि सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य लेने पर श्रमिकों को निर्धारित दर से दोगुना ओवरटाइम भुगतान करना होगा और प्रत्येक श्रमिक को वेतन पर्ची उपलब्ध कराना भी जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि श्रम कानूनों के अनुपालन में किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो श्रम विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण कर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश सरकार उद्योगों और उद्यमों को लगातार प्रोत्साहन दे रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 32,559 कारखानों में से 17,956 कारखाने वर्ष 2017 के बाद स्थापित हुए हैं। इसके बावजूद महंगाई में लगातार वृद्धि के अनुरूप मजदूरों के वेतन और पारिश्रमिक में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है।
पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल ने कहा कि सभी उद्यमियों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के नाम पर अराजकता और अशांति फैलाने वाले तत्वों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ श्रम अधिनियमों के साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि निर्धारित न्यूनतम वेतन देना श्रम अधिनियमों के तहत अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन और वेतन पर्ची जैसे मूल प्रावधानों के अनुपालन की नियमित समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रमिक और उद्यमी एक-दूसरे के पूरक हैं तथा उद्योगपतियों को श्रमिकों के हितों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
बैठक में कानपुर नगर और कानपुर देहात के लिए नई न्यूनतम वेतन दरों की जानकारी भी साझा की गई। इसके अनुसार कानपुर नगर में अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये तथा कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन निर्धारित किया गया है। वहीं कानपुर देहात में अकुशल श्रमिकों के लिए 12,356 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए 13,590 रुपये तथा कुशल श्रमिकों के लिए 15,224 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन तय किया गया है।
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