बारां , जुलाई 25 -- राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश फरजन्द अली ने शनिवार को कहा कि न्यायालय भवन न केवल एक इमारत है, बल्कि न्याय का मंदिर है, जिसमें लोगों की आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास होता है।
न्यायमूर्ति अली ने यहां जिला न्यायालय परिसर में आयोजित न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रम-2 के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण समारोह में कहा कि लोगों को न्याय मंदिर से न्याय मिलने की उम्मीद होती है। नवनिर्मित भवन लोगों को न्याय दिलाने में मदद करेगा। न्यायालय भवन की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी की न्याय की है। विकसित समाज की नींव निष्पक्ष, स्वतंत्र और निर्भीक न्यायिक प्रणाली से ही होती है। न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखायी भी देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ही संविधान और आमजन के मौलिक अधिकारों के रक्षक के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ऐसे में आमजन के अधिकारों की रक्षा करना न्यायपालिका की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए केवल इच्छाएं करने से काम नहीं चलता, बल्कि कड़ी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है। मेहनत का कोई आसान तरीका नहीं होता। मनोरथ से कुछ नहीं मिलता, मेहनत करनी होगी, मेहनत से कुछ भी संभव है।
उन्होंने कहा कि करूणा न्याय का अविभाज्य हिस्सा है, करूणा के बिना न्याय का अस्तित्व नहीं है। करूणा सबसे बड़ा धर्म और क्षमा करने से बड़ा कोई धर्म नहीं है।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे बारां के जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण टेलर ने माननीय संरक्षक न्यायाधिपति के लोकार्पण के लिये आगमन पर धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि नया न्यायालय भवन आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण हैं, जो न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और सुलभ बनाने में सहायक सिद्ध होगा। नये भवन से आमजन के समय की बचत होगी और डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता का लाभ मिलेगा। भवन का निर्माण शारीरिक रूप से असक्षम वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल कराया गया है, ताकि इन्हें आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
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