रांची , अगस्त 21 -- झारखंड के भाकपा माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि लंबे आंदोलनों के बाद जेपीएससी-जेएसएससी आदि परीक्षाओं में हुए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ छात्र-नौजवानों को मिली जीत उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश से फिलहाल नए कानूनी पेच में फंस चुकी है।

श्री भक्त ने आज यहां कहा कि उच्च न्यायालय इस तरह के संवेदनशील मसलों को किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंचा सकता है या नहीं, यह कहना मुश्किल है। ऐसे कई मामले पहले भी न्यायालय के समक्ष विचाराधीन रहे हैं, लेकिन उनका कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में केवल न्यायालय के फैसले का इंतजार करने से छात्र-अभ्यर्थियों की समस्या का समाधान नहीं होगा।

श्री भक्त ने कहा कि छात्रों-अभ्यर्थियों को इस दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए हेमंत सरकार को कानूनी तौर पर कारगर पहल करने की जरूरत है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए। लंबे समय से परीक्षा में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ छात्र-नौजवान आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मांगों और उनके भविष्य के साथ सरकार को गंभीरता से पेश आना चाहिए।

उन्होंने कहा कि न्यायालय के पाले में गेंद डालकर हेमंत सरकार निश्चिंत नहीं रह सकती। सरकार को छात्र-अभ्यर्थियों के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना होगा और इस मामले के न्यायपूर्ण समाधान के लिए सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाने होंगे।

श्री भक्त ने कहा कि परीक्षा में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर रोक और समयबद्ध नियुक्ति छात्र-युवाओं का अधिकार है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का खामियाजा ईमानदारी से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को न भुगतना पड़े। छात्र-नौजवानों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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