चेन्नई , मार्च 08 -- तमिलनाडु सरकार द्वारा केंद्र-राज्य संबंधों पर गठित सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति ने अपनी भाग-एक रिपोर्ट में राज्यपाल पद पर पुनर्विचार करने की सिफारिश की है। समिति ने पाया है कि भारत के औपनिवेशिक काल का राज्यपाल पद का मॉडल अब प्रासंगिक नहीं रह गया है और इस पद को मौलिक रूप से पुनर्गठित और गैर-राजनीतिक बनाया जाना चाहिए ताकि यह जवाबदेही, संयम और संघीय औचित्य पर आधारित एक तटस्थ संवैधानिक प्रहरी के रूप में कार्य कर सके।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 में बदलाव का सुझाव दिया ताकि विधेयकों की मंज़ूरी, वापसी या आरक्षण के लिए ज़रूरी समय सीमा शामिल की जा सके और समय खत्म होने पर इसे मंज़ूर माना जाय।

तमिलनाडु सरकार की ओर से इस रिपोर्ट के कुछ हिस्से प्रेस विज्ञप्ति के जरिये जारी किये गये। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यपाल के पद पर पुनर्विचार होना चाहिए और इसे राजनीति से दूर रखना चाहिए ताकि यह जवाबदेही, संयम और संघीय औचित्य पर आधारित एक तटस्थ संवैधानिक पहरेदार के तौर पर काम कर सके। समिति ने अनुच्छेद 200 और 201 में संवैधानिक संशोधन का सुझाव दिया ताकि विधेयकों की मंज़ूरी, वापसी या आरक्षण के लिए बाध्यकारी समय रेखा शामिल की जा सके और इसकी समाप्ति पर इसे मंज़ूर मान लिया जाए।

जहाँ संवैधानिक रूप से ज़रूरी हो, उसे छोड़कर, राज्य सूची संबंधी विधेयक रोका नहीं जाना चाहिए। राज्यपाल को ऐसे विधेयकों को 15 दिनों के अंदर मंज़ूरी देनी चाहिए या इसे वापस करना चाहिए। अगर विधानसभा इसे द्वारा दोबारा पारित करके फिर से राज्यपाल को भेजती है तो 15 दिनों के अंदर इसे मंज़ूरी मिलनी चाहिए। इसी तरह की समवर्ती सूची विधेयकों को सीमित करने पर भी लागू होनी चाहिए, सिर्फ़ अनुच्छेद 254 के तहत केंद्रीय विधेयक के खिलाफ़ होने पर ही इसे रोका जाना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आज राज्यपाल को राज्य के संवैधानिक प्रमुख के तौर पर कम और औपनिवेशिक नियंत्रण के प्रतीक के तौर पर ज़्यादा देखा जाता है। समिति ने कहा है कि केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से राज्यपाल पद के गलत इस्तेमाल ने लोकतांत्रिक जनादेश को कमज़ोर किया है, विधायी प्रक्रिया में रुकावट डाली है, संघ-राज्य संबंध को खराब किया है, और संवैधानिक भरोसे को कमज़ोर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, ''जब परंपराएं लड़खड़ाती हैं, तो संवैधानिक संशोधन के जरिये स्पष्टता दी जानी चाहिए।

गौरतलब कि यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री एम के स्टालिन को सौंपी गयी थी और बाद में 16वीं विधानसभा की आखिरी सत्र में पेश की गयी थी। इसमें कहा गया कि राज्यपाल के पद के लगातार गलत इस्तेमाल को देखते हुए, अप्रैल 2025 में बनी कुरियन जोसेफ कमेटी ने ऐसे सुधारों की सिफारिश की है जो संघीय संतुलन को ठीक कर सकें।

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