कोच्चि , अक्टूबर 27 -- केरल के चेरानल्लूर में कथित तौर पर 17 वर्षीय किशोर द्वारा चलाई जा रही कार की टक्कर से हुई सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले जयबालकृष्णन के परिजनों ने संबंधित अतिरिक्त जिला न्यायाधीश को निलंबित करने, उनके नाबालिग बेटे की जमानत रद्द करने और पुलिस थाने के भीतर मोबाइल फोन से तस्वीरें कथित तौर पर मिटाने के मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

पीड़ित की बेटी भद्रा कीर्ति ने आरोप लगाया कि परिवार का मोबाइल फोन जबरन छीनकर जज के परिवार के एक दोस्त को सौंप दिया गया, जिसने किशोर की तस्वीरें डिलीट कर दीं। उसने सवाल उठाया कि पुलिस थाने के भीतर ऐसी घटना कैसे हो सकती है और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की व्यापक जांच की मांग की।

परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि अधिकारी शाम चार बजे की समयसीमा तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं करते हैं, तो वह अपना आंदोलन तेज करेगा। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के इस आश्वासन के बाद विरोध प्रदर्शन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया कि कानून-व्यवस्था के प्रभारी एडीजीपी पी. विजयन कोच्चि पहुंचकर परिवार के साथ बातचीत करेंगे।

भद्रा कीर्ति ने मीडिया से कहा, "अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो आप मेरा शव देखेंगे। तभी आप मुझे यहां से बाहर ले जा सकेंगे।" उन्होंने न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

घटना का जिक्र करते हुए भद्रा कीर्ति ने कहा कि परिवार से मोबाइल फोन छीनकर न्यायाधीश के परिवार के मित्र बताए गए एक व्यक्ति को दे दिया गया। उपकरण से आरोपी की तस्वीरें हटा दी गईं।

उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार को दोबारा तस्वीरें न लेने की चेतावनी दी गई और जब वे किशोर की जमानत पर रिहाई का स्पष्टीकरण मांगने पुलिस थाने पहुंचे तो उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसे उन्होंने कोई अपराध किया हो।

परिवार ने फोन जबरन छीनने और तस्वीरें हटाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है, साथ ही जिम्मेदार पाए गए पुलिसकर्मियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने उन परिस्थितियों पर सवाल उठाया है, जिनमें पुलिस थाने के भीतर एक निजी व्यक्ति को फोन सौंपा गया था।

परिवार ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा किशोर को दी गई जमानत रद्द करने और हादसे में नाबालिग बेटे की संलिप्तता को लेकर न्यायाधीश के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।

परिवार के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199 के तहत न्यायाधीश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वह इस कार्रवाई को हालांकि अपर्याप्त मानते हैं और आगे की कानूनी तथा प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।

भद्रा कीर्ति ने यह भी आरोप लगाया कि जब न्यायाधीश से उनके नाबालिग बेटे को गाड़ी चलाने देने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया, "आपको मुझे कानून सिखाने की जरूरत नहीं है।" अपने पिता के बारे में बात करते हुए भद्रा कीर्ति ने कहा कि वे आठ वर्षों से एक ही दिनचर्या का पालन कर रहे थे और बहुत संभलकर गाड़ी चलाते थे। उन्होंने दावा किया कि वे 30 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से गाड़ी नहीं चलाते थे।

उन्होंने कहा, "मैंने अपने पिता की तरह किसी को इतनी सावधानी और सुरक्षा से गाड़ी चलाते नहीं देखा। मुझे अब भी लगता है कि वे घर लौट आएंगे। मैं यह स्वीकार नहीं कर सकती कि वे अब इस दुनिया में नहीं हैं।"उन्होंने कहा कि परिवार पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए अस्थायी रूप से घर लौटेगा, लेकिन यदि अधिकारी उचित कार्रवाई करने में विफल रहे तो आंदोलन जारी रखेगा। उसने चेतावनी भी दी कि यदि आवश्यक हुआ तो उसकी मां और छोटा भाई भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे।

इससे पहले, डीसीपी अरुण के पवित्रन ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की और पुलिस के उठाए गए कदमों की जानकारी दी। परिवार विशेष रूप से पुलिस थाने के भीतर तस्वीरें डिलीट किए जाने के आरोप को लेकर असंतुष्ट है।

विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी परिवार के समर्थन में विरोध मार्च निकाला।

गृह मंत्री के इस आश्वासन के बाद परिवार आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित करने पर सहमत हुआ कि एडीजीपी पी विजयन कोच्चि में उनसे मुलाकात करेंगे। उसने स्पष्ट किया है कि यदि बातचीत में संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली तो प्रदर्शन फिर से शुरू होगा।

प्रस्तावित बैठक को घातक दुर्घटना और पुलिस स्टेशन में हुई घटना के संबंध में जवाबदेही और आगे की कार्रवाई की परिवार की मांगों को हल करने में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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