नयी दिल्ली , जून 22 -- भारतीय रेल इंजीनियरिंग कंपनी ई टू ई ट्रांसपोर्टेशन के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी नोवा कंट्रोल टेक्नोलॉजिक्स आने वाले कुछ वर्षों में सुरक्षा से जुड़ी नयी तकनीकों के अनुसंधान एवं विकास पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश करेगी।

कंपनी की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि कंपनी का ध्यान रेलवे सिग्नलिंग, ट्रेन सुरक्षा प्रणाली और परिचालन तकनीक (ओटी) साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को और मजबूत बनाने पर है। कंपनी ने कहा है कि भारतीय रेलवे तेजी से कवच प्रणाली का विस्तार कर रहा है और अपनी कार्यप्रणाली में डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। ऐसे में, साइबर सुरक्षा भी अब रेलवे सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।

ई2ई रेल और नोवा कंट्रोल टेक्नोलॉजिक्स के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सौरजीत मुखर्जी ने कहा, "रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। कवच जैसी तकनीकों ने ट्रेन सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाया है, लेकिन सिग्नलिंग, ट्रेन नियंत्रण और अन्य परिचालन प्रणाली में बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ अब उद्योग की जरूरतें भी बदल रही हैं।"उन्होंने कहा, "साइबर सुरक्षा को अब सिर्फ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से जुड़ा एक अलग काम मानकर नहीं देखा जा सकता। इसे रेलवे सुरक्षा का एक अहम हिस्सा बनाना होगा, जो रेलवे संचालन को सुरक्षित, भरोसेमंद और बिना रुकावट के चलाने में मदद करे। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क अधिक संबद्ध और डेटा आधारित होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे ऐसी व्यवस्था की जरूरत बढ़ रही है, जहाँ सुरक्षा, सिग्नलिंग और साइबर सुरक्षा एक साथ मिलकर काम करें।"कंपनी के अनुसार, यह निवेश उसकी इन-हाउस आरएंडडी क्षमताओं को मजबूत करने और रेलवे सुरक्षा, सिग्नलिंग, साइबर सुरक्षा तथा डिजिटल रेलवे तकनीकों से जुड़े स्वदेशी डीप-टेक समाधान विकसित करने पर खर्च किया जाएगा। ई2ई रेल के संस्थापक अध्यक्ष विनय राव ने कहा, "रेलवे सुरक्षा तकनीकों के क्षेत्र में भारत के पास दुनिया में बड़ी भूमिका निभाने का मौका है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए नोवा आने वाले कुछ वर्षों में अगली पीढ़ी के रेलवे सुरक्षा प्रणाली की अनुसंधान और विकास पर 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश करेगी।"उन्होंने कहा, "हमारी कोशिश भारत में ऐसी नई तकनीकें और विशेषज्ञता विकसित करने की है, जो रेलवे सुरक्षा को और बेहतर बनाए, देश को तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर बनाए और दुनिया के दूसरे देशों तक भी पहुँच सके। हमें भरोसा है कि भारतीय रेलवे में हो रहा बदलाव आने वाले समय में ऐसी विश्वस्तरीय रेलवे तकनीकों को जन्म देगा, जिनका इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में किया जा सकेगा।"उन्होंने बताया कि विस्तार की योजना के तहत नोवा रेलवे तकनीक , साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमता और अन्य नयी अभियांत्रिकी तकनीकों से जुड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी और निवेश के अवसर तलाश रही है।

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